बिजली आपूर्ति ध्वस्त: कागजों पर 22 घंटे, धरातल पर दो घंटे भी नही

बिजली आपूर्ति ध्वस्त: कागजों पर 22 घंटे, धरातल पर दो घंटे भी नही

# अघोषित बिजली कटौती व उमस भरी गर्मी में गांव से कस्बे तक लोग बेहाल, रातभर रतजगा करने को बाध्य

खेतासराय, जौनपुर।
डॉ. सुरेश कुमार 
तहलका 24×7
           भीषण गर्मी और उमस के बीच कस्बा सहित आसपास के गांवों में बिजली संकट गहराता जा रहा है। हालात यह है कि कागजों पर 22 घंटे विद्युत आपूर्ति के दावे किए जा रहे हैं,जबकि धरातल पर लोगों को दो घंटे भी लगातार बिजली नहीं मिल पा रही है।लगातार हो रही घंटों की कटौती से आमजन में त्राहिमाम मचा हुआ है। दिन में तेज धूप के बीच हीटवेब से बचने के लिए मौसम विभाग अडवाइजरी जारी कर रहा है,घरों में रहने की सलाह दी जा रही है। लेकिन बिजली नही दी जा रही है।
रात में उमस भरी गर्मी के कारण लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।बिजली न रहने से पंखे,कूलर और इन्वर्टर जवाब दे रहे हैं।बूढ़े,बच्चे और महिलाएं सबसे अधिक परेशान हैं।रातभर लोग घरों से निकलकर सड़कों,गलियों और चौराहों पर समय बिताने को मजबूर हैं।कस्बा निवासी रिशु श्रीवास्तव का कहना है कि पूर्व सांसद कृष्ण प्रताप सिंह के प्रयास से कस्बे के लिए पूर्वांचल से बिजली सप्लाई हुई थी,अलग से फीडर की व्यवस्था कराई गई थी,जिससे लगभग 22 घंटे बिजली आपूर्ति नगर को मिल सके।
लेकिन वर्तमान में व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों कटौती की जा रही है।कई बार पूरी रात और दिनभर बिजली गायब रहती है।ट्रिपिंग और लो ओलटेज की समस्या बनी रहती है।ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और भी खराब है।अंधेरे और गर्मी के बीच लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।क्षेत्र के बादशाही,सबरहद,अहीरों परशुराम पुर,सोंगर,देवकली, भादी फीडर पर आपूर्ति नाम मात्र है।
सबरहद फीडर पर लगातार बिजली ट्रिप और अघोषित बिजली कटौती से उपभोक्ता परेशान हैं।व्यापारियों का कहना है कि बिजली संकट का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है।डी-फ्रीजर और कूलिंग सिस्टम बंद रहने से दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।उद्योग व व्यापार ठप्प है।प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र रातभर गर्मी और मच्छरों के बीच पढ़ने को विवश हैं।बिजली व्यवस्था को लेकर लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।जो कभी भी सड़क पर दिखाई पड़ सकता है।
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