संघ अडिग: अब डमी नहीं चलेगा, संजय जोशी ही बनेंगे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष! 

संघ अडिग: अब डमी नहीं चलेगा, संजय जोशी ही बनेंगे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष! 

# 30 मार्च को नागपुर पहुंचेंगे पीएम मोदी, बहाना होगा माधव नेत्र अस्पताल के शिलान्यास का, जिसमें पूर्व संगठन मन्त्री रहे संजय जोशी से सम्भावित मुलाकात में दोनों पुराने मित्रों के दिलों की कड़वाहट भी दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है। 

# संघ प्रमुख मोहन भागवत और पीएम नरेंद्र मोदी वर्षों बाद एक साथ बैठेंगे, उनके बीच संगठन और सरकार के सुचारु संचालन की योजनाओं पर विस्तृत बातचीत होने की खबर है, इसी दौरान दोनों संगठनों के बीच जारी गतिरोध भी दूर होगा। 

कैलाश सिंह
राजनीतिक संपादक
नागपुर/नई दिल्ली।
तहलका 24×7
            अब इस बात की संभावना प्रबल हो गई है कि भाजपा के पूर्व संगठन मन्त्री संजय जोशी का 18 साल से चल रहा वनवास खत्म हो जाएगा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने 21 से 23 मार्च तक तीन दिन बेंगलुरु में हुई प्रतिनिधि सभा की बैठक में वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के जरिये कथित पार्टी हाई कमान (गुजरात लॉबी) को संदेश दे दिया था की अब कोई डमी नाम अथवा अन्य बहाना नहीं चलेगा।इससे साफ़ हो जाता है कि नव संवत्सर में राम नवमी के बाद भाजपा को नया अध्यक्ष मिल जाएगा, ऐसे में यह भी जाहिर है कि नाम पर निर्णय से पहले संघ प्रमुख और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच संवाद जरूरी है, जो वर्षों से बाधित है।
इसी दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में संजय जोशी के नाम पर भी सहमति बनने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि यह संदेश मिलने के बाद से भाजपा में आंतरिक खलबली मची है।नागपुर में संघ मुख्यालय पर प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का 30 मार्च को पहुंचना पहली ऐसी घटना होगी जो संघ के इतिहास में दर्ज होगी, हालांकि वह माधव नेत्र चिकित्सालय के शिलान्यास समेत विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। लेकिन संघ के नजदीकी सूत्र बताते हैं कि इसी दौरान मोदी और जोशी की मुलाकात भी हो सकती है।
यदि दोनों पुराने घनिष्ठ फिर मिले तो उनके बीच दो दशक से चल रही कड़वाहट के दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दरअसल ढाई दशक पूर्व ‘मोदी और जोशी’ की जोड़ी या यूं कहें, गहरी दोस्ती की नींव तब हिल गई थी जब वर्ष 2000 में गुजरात के सीएम केशू भाई पटेल बने। इस दौरान पार्टी के निर्देश पर दोनों को गुजरात से बाहर होना पड़ा था, लेकिन मोदी दो साल के भीतर ही दिल्ली से ताकतवर होकर लौटे तो सीएम की कुर्सी पर काबिज हो गए, यहां से उतरे तो दिल्ली के तख्त पर बैठ गए।
लेकिन प्रायोजित सीडी प्रकरण ने संजय जोशी को राजनीति के नेपथ्य में ढकेल दिया।बावजूद इसके, उनकी राजनीतिक और सांगठनिक क्षमता में लेसमात्र कमी आने की बजाय वह अपनी व्यवहार कुशलता के चलते बिना सत्ता के ‘राजा’ बने रहे।आज भी देशभर के संघ हो या भाजपा से जुड़े लोग अथवा उनके माध्यम से आये व्यक्तियों की समस्या निवारण वह फोन के जरिये कर देते हैं।विगत नौ महीने से उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की चर्चाओं के बाद से भीड़ में इजाफा हो चुका है।
उनसे मिलने वाला हर कोई उनकी सादगी और बेबाकी का कायल हो जाता है।नये अध्यक्ष के नाम पर सहमति बनने के बाद भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तरफ से मंजूरी 18 अप्रैल को दी जाएगी। इसके लिए बेंगलुरु में भाजपा की बैठक पूर्व से निर्धारित है।अध्यक्ष के मामले में तस्वीर साफ होने के बाद दिल्ली और लखनऊ के बीच जारी शीत युद्ध ‘बाधा दौड़’ रुकेगी और प्रदेश सरकार को नई दिशा और ताकत मिलेगी।संघ मानता है कि हिंदुत्व और सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने और मजबूती देने के लिए उसे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के रूप में बड़ा चेहरा मिल चुका है।
पिछले दिनों एक मीडिया संस्थान से हुई बातचीत में योगी द्वारा दिये गए बयान के भी विभिन्न मायने निकाले जा रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यदि योगी सीएम की कुर्सी से छोड़ेंगे तो उन्हें राष्ट्रीय पैमाने पर कोई बड़ा ओहदा या जिम्मेदारी मिलेगी। इसके बाद उत्तर प्रदेश का अगला सीएम आंतरिक कलह मचाने वालों से हटकर दिल्ली की तर्ज पर कोई ऐसा चेहरा सामने आयेगा, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारे के लोग फ़िर हैरत में होंगे। यह भी माना जा रहा है कि संघ की जुगलबन्दी से 2047 तक भाजपा केन्द्र और राज्यों की सत्ता पर काबिज रहने के मंसूबे पर अग्रसर है।
Previous article50 हजार कर्ज का ब्याज 10 लाख, परेशान आदमी ने खत्म कर ली जिंदगी
Next articleपेपर मिल का बॉयलर फटने से तीन मजदूरों की मौत, एक गम्भीर, मिल मालिक पर कार्रवाई की मांग
Tahalka24x7
तहलका24x7 की मुहिम... "सांसे हो रही है कम, आओ मिलकर पेड़ लगाएं हम" से जुड़े और पर्यावरण संतुलन के लिए एक पौधा अवश्य लगाएं..... ?