सुल्तानपुर : संस्कृत भाषा से है भारत की पहचान- कपाली बाबा
# देवभाषा सम्मान से सम्मानित हुई सात विभूतियां
सूरापुर।
मुन्नू बरनवाल
तहलका 24×7
देवभाषा संस्कृत को राष्ट्र भाषा बनाने की जरूरत है। संस्कृत राष्ट्रभाषा बने इसके लिए प्रयास करना होगा। संस्कृत और संस्कृति से भारत की प्रतिष्ठा है। इस प्रतिष्ठा को बरकरार रखना हमारा उत्तरदायित्व है।देवभाषा संस्कृत को राष्ट्र भाषा बनाने की जरूरत है। उक्त बातें पूर्व विधायक देवमणि द्विवेदी ने कहीं। वे संस्कृत दिवस पर विजेथुआ महावीरन धाम में अघोरपीठ बाबा सत्यनाथ मठ के केंद्रीय विद्वत परिषद द्वारा आयोजित सम्मान समारोह को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे।

परिषद के संरक्षक और पीठाधीश्वर उग्र चण्डेश्वर कपाली बाबा ने कहा कि देवभाषा संस्कृत को राष्ट्र भाषा बनाने की जरूरत है। दुनिया की विभिन्न भाषाओं में ज्ञान विज्ञान की जो भी बातें हैं वह सब संस्कृत भाषा से नकल की गई हैं। राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर व परिषद के सह संयोजक ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि संस्कृत भाषा सनातन है।सनातन परम्परा केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि समस्त जीव जंतु, धरती व ब्रह्माण्ड के कल्याण की बात करती है। संस्कृत को समझने के लिए हमें अपनी आंतरिक क्षमता बढ़ाना होगा। संचालन परिषद के अध्यक्ष डॉ सुशील कुमार पाण्डेय साहित्येन्दु व स्वागत संयोजक अजय बहादुर सिंह ने किया। आभार ज्ञापन पत्रकार श्यामचंद्र श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर रणविजय सिंह, विजय गिरि, कुसुम सिंह, अन्नू सिंह, राजकुमार, अम्बरीष , रमाशंकर सिंह, प्रभुराज सिंह, घनश्याम चौहान, रामू मोदनवाल सहित अनेक प्रमुख लोग उपस्थित रहे।


















