हुक्का बार संचालकों को हाईकोर्ट का झटका: कहा-मौलिक अधिकार नहीं
लखनऊ।
विजय आनंद वर्मा
तहलका 24×7
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हुक्का बार संचालकों को बड़ा झटका देते हुए कहा है कि हुक्का बार चलाना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत कोई मौलिक अधिकार नहीं है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए राज्य सरकार ऐसे कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अधिकार रखती है।

जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने एम्पेरियो ग्रैंड प्राइवेट लिमिटेड समेत कई हुक्का बार संचालकों की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा।याचिकाकर्ताओं ने प्रशासन की ओर से हुक्का बार बंद कराने की कार्रवाई और नए लाइसेंस जारी न किए जाने को चुनौती दी थी।उनका कहना था कि यह उनके व्यवसाय करने के अधिकार का उल्लंघन है, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि हुक्का बारों में तंबाकू और निकोटीन का सेवन होता है,जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।अदालत ने इसे‘रेस एक्स्ट्रा कमर्शियम’की श्रेणी में माना,यानी ऐसा कारोबार जिसे सामान्य व्यापारिक गतिविधियों की तरह मौलिक संरक्षण प्राप्त नहीं है।कोर्ट ने कहा कि शराब और जुए की तरह ऐसे व्यवसायों को नियंत्रित या प्रतिबंधित करना सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।

अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का संवैधानिक दायित्व है।ऐसे में यदि सरकार हुक्का बारों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का फैसला करती है तो उसे असंवैधानिक नहीं माना जा सकता।हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में हुक्का बारों पर सख्त कार्रवाई और संभावित पूर्ण प्रतिबंध की चर्चा तेज हो गई है।

















