स्वाभिमान खातिर जिन्हें खानी पड़ी थी दो जून की घास की रोटियां- अन्ना
मछलीशहर।
दीपक श्रीवास्तव
तहलका 24×7
विकास खंड मछलीशहर की ग्राम पंचायत बामी के भूतपूर्व ग्राम प्रधान स्वर्गीय रामबहादुर सिंह की स्मृति में निर्मित महाराणा प्रताप प्रवेश द्वार पर वृहस्पतिवार को महाराणा प्रताप की 482वीं जयंती मनाई गई।कार्यक्रम के आरंभ में राष्ट्रीय गौरव रत्न सम्मान प्राप्त समाजसेवी जज सिंह अन्ना ने महाराणा प्रताप की विशाल मूर्ति पर माल्यार्पण किया तत्पश्चात दीप प्रज्ज्वलित करके मूर्ति की आरती उतारी। उपस्थित लोगों ने महाराणा प्रताप अमर रहें के नारे लगाये।

उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए जज सिंह अन्ना ने कहा कि महाराणा प्रताप ने राष्ट्र के स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया जिसके चलते उनका जीवन संघर्षों से जूझता रहा। अपने जीवन के कठिन दिनों में राजा होते हुये भी जंगल में उन्हें दो जून की रोटी भी घास की ही नसीब होती थी। उनके समकालीन राजपूत राजा राष्ट्र के स्वाभिमान से समझौता कर मुगल दरबार में छप्पन भोग का आनंद लेते थे। लेकिन उन राजपूत राजाओं का सम्मान आज महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक और हाथी रामप्रसाद से भी कम है।कहा जाता है कि उनके हाथी रामप्रसाद ने हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले 13 हाथियों को मार डाला था। जब मुगल सेना ने 14 महावतों की मदद से रामप्रसाद को बन्दी बना लिया तो उसने स्वामिभक्ति के चलते 18 दिनों तक मुगल सेना द्वारा दिया कोई भोजन ग्रहण नहीं किया और अपने प्राण त्याग दिए।



















