आजमगढ़ : फूलपुर-पवई सपा प्रत्याशी रमाकांत के विरोध में उतरे सपाई

आजमगढ़ : फूलपुर-पवई सपा प्रत्याशी रमाकांत के विरोध में उतरे सपाई

# हजारों सपाईयों ने पूर्व विधायक श्याम बहादुर के नेतृत्व में दिया सामूहिक इस्तीफा

आजमगढ़।
फैज़ान अहमद
तहलका 24×7
                 जनपद में सपा के टिकट वितरण के बाद लगातार असंतोष बढ़ रहा है। गोपालपुर के बाद फूलपुर में भी असंतोष बढ़ने लगा है। फूलपुर-पवई से सपा ने पूर्व सांसद रमाकांत यादव को प्रत्याशी बनाया है। बाहुबली रमाकांत यादव को प्रत्याशी बनाने का जमकर विरोध हो रहा है। पूर्व विधायक श्याम बहादुर यादव के पक्ष में विधानसभा प्रभारी, सेक्टर प्रभारी, बूथ प्रभारी सहित हजारों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा निजामाबाद, गोपालपुर, दीदारगंज और फूलपुर में सपा प्रत्याशी को अपने ही लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

सपा महासचिव ओंकार यादव ने बताया कि हम लोगों ने जिलाध्यक्ष हवलदार यादव को इस्तीफा दे दिया है। रविवार को हम प्रत्याशी बदलने की मांग को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलेंगे। अगर नेतृत्व बात नहीं मानता तो हम लोग सपा प्रत्याशी के खिलाफ खड़े होंगे। सपा ने 2012 और 2017 में यहां से श्याम बहादुर यादव को चुनाव लड़वाया था। 2012 में श्याम बहादुर को विजय मिली थी। 2017 में रमाकांत यादव के बेटे भाजपा प्रत्याशी अरुण कांत यादव ने श्याम बहादुर को हरा दिया था। अब रमाकांत यादव सपा में हैं और उनका टिकट भी यहां से फाइनल हो गया है। इस प्रकार श्याम बहादुर यादव का पत्ता कट गया। श्याम बहादुर यादव के समर्थन में आए लोगों ने कहा कि 2017 के चुनाव में रमाकांत यादव ने भाजपा का गांव- गांव प्रचार किया था। सपा कार्यकर्ताओं से काफी मारपीट भी हुई थी, लेकिन सपा कार्यकर्ता मोर्चे पर डटे थे।

आज उन्हीं सपा कार्यकर्ताओं के संघर्ष की अनदेखी कर रमाकांत यादव को ही टिकट दे दिया गया।बताते चलें कि रमाकांत यादव 1985 में विधानसभा का चुनाव जीतने वाले बाहुबली रमाकांत यादव की गिनती पूर्वांचल के बाहुबलियों में होती है। 4 बार विधायक और 4 बार के सांसद रमाकांत यादव को 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव से हार का सामना करना पड़ा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने पर भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। भदोही से कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ने चले गए थे मगर, उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
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