जंतर-मंतर से देश की राजनीति तक: छात्र आंदोलन तेज,सरकार-विपक्ष आमने-सामने
नई दिल्ली।
तहलका 24×7
कथित परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज भी प्रदर्शन जारी है।कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और कुछ स्थानों पर झड़पों के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र,युवा और विभिन्न संगठनों के समर्थक प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।कई मेट्रो स्टेशनों पर सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की है।दिल्ली पुलिस ने भारी सुरक्षा बल तैनात किया है। कुछ स्थानों पर पथराव और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं भी सामने आई हैं,जबकि आंदोलनकारी हिंसा के आरोपों से इनकार कर रहे हैं।सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि छात्रों के आक्रोश को केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं माना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी मंत्री के इस्तीफा देने से जनता का भरोसा बहाल होता है,तो सरकार को ऐसा कदम उठाने से नहीं हिचकना चाहिए।हालांकि उन्होंने किसी राजनीतिक दल के आंदोलन का औपचारिक समर्थन नहीं किया है,बल्कि जवाबदेही और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया है।विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद और सड़क दोनों जगह उठाने की तैयारी में हैं।विपक्ष के फ्लोर लीडरों की बैठक बुलाई गई है।कांग्रेस सहित कई दल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा सुधार पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं।

कांग्रेस नेता पी.चिदंबरम सहित कई नेताओं ने कहा है कि मंत्री का इस्तीफा तनाव कम करने की दिशा में एक कदम हो सकता है।वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार इस मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवाओं का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है।सरकार ने पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की है।उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने का आश्वासन दिया है।

हालांकि, सरकार ने अभी तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के संकेत नहीं दिए हैं।फिलहाल आंदोलन समाप्त होने के संकेत नहीं हैं।प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि सरकार सुधारों और कानूनी कार्रवाई की बात कर रही है।यदि दोनों पक्षों के बीच जल्द कोई सहमति नहीं बनती,तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और देश की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है।


















