NEET पेपर लीक विवाद: छात्र आंदोलन के पुराने इतिहास को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर उठे सवाल
नई दिल्ली।
तहलका 24×7
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विपक्ष और छात्र संगठनों के निशाने पर हैं।इसी बीच उनके छात्र जीवन का एक पुराना आंदोलन भी चर्चा में आ गया है।बताया जा रहा है कि वर्ष 1997 में ओडिशा में कथित परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन में धर्मेंद्र प्रधान ने सक्रिय भूमिका निभाई थी।उस समय राज्य में कांग्रेस नेता जानकी बल्लभ पटनायक की सरकार थी।

भुवनेश्वर स्थित राज्य सचिवालय के बाहर लगभग 1,500 छात्रों ने कथित पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन किया था,जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तत्कालीन राष्ट्रीय सचिव के रुप में धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल थे।अंग्रेजी अखबार द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार,धर्मेंद्र प्रधान 18 वर्ष की आयु में छात्र राजनीति से जुड़े और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध छात्र संगठन एबीवीपी में सक्रिय रहे।

उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय से मानव विज्ञान (एंथ्रोपोलॉजी) की पढ़ाई की और वर्ष 1994 से 1997 के बीच दो बार एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव रहे।रिपोर्ट में प्रधान के सहयोगी और उनके जूनियर रहे प्रशांत राउत के हवाले से कहा गया है कि सचिवालय के बाहर शुरु हुआ प्रदर्शन प्रारंभ में शांतिपूर्ण था,बाद में पुलिस कार्रवाई हुई।

राउत का दावा है कि इस दौरान धर्मेंद्र प्रधान गंभीर रुप से घायल हुए थे और उन्हें फ्रैक्चर भी हुआ था।अब NEET पेपर लीक विवाद के बीच विपक्ष और छात्र संगठन धर्मेंद्र प्रधान के इसी छात्र आंदोलन का हवाला देते हुए मौजूदा मामले में उनकी भूमिका और जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं।वहीं,केंद्र सरकार का कहना है कि NEET पेपर लीक मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हैं।


















