जौनपुर : तीन दशक से बंद सरकारी कोल्ड स्टोरेज के चालू होने की बढ़ी सम्भावना

जौनपुर : तीन दशक से बंद सरकारी कोल्ड स्टोरेज के चालू होने की बढ़ी सम्भावना

# नये विधायक और नई सरकार की ओर अन्नदाता देख रहे हैं आस भरी निगाहों से…

खुटहन।
मुलायम सोनी
तहलका 24×7
                  वर्तमान में हुए विधानसभा चुनाव में पहली बार दशको से बंद पड़े लाखों की लागत से बने स्थानीय शीतगृह मुद्दा बना। जिसे विजयी होने के बाद को पुनः चालू कराने का भरोसा भाजपा व निषाद पार्टी के संयुक्त प्रत्याशी रमेश सिंह ने दिया था। उनकी जीत के साथ किसानों में एक बार फिर उम्मीद जाग उठी है। इसे बंद कर दिए जाने से किसानों को आलू भंडारण के लिए तमाम समस्याएं झेलनी पड़ रही है। उन्हें दूर दराज स्टोरो मे बिचौलियों के माध्यम से आलू का भंडारण करना पड़ता है। जिसके चलते किसानों को श्रम समय और धन का नुकसान सहना पड़ता है। अब किसानों को विश्वास है कि शीत गृह चालू होकर रहेगा। परिणामतः उनकी एक बड़ी समस्या समाप्त हो जायेगी।
बताते चलें कि खुटहन सरकारी शीतगृह के निर्माण हेतु 5 मई सन् 1972 को तत्कालीन सहकारिता मंत्री लक्ष्मी शंकर यादव के द्वारा शिलान्यास किया गया था। उस समय किसानों में खुशी की लहर व्याप्त हो गई थी। इस शीतगृह में पहली बार सन् 1975 में आलू का भंडारण किया गया था। पैक्स पैड द्वारा निर्मित इस शीतगृह में दो चेंबर बनाए गए थे। जिसकी क्षमता 200 मेट्रिक टन आलू भंडारण की थी। उस समय इसके निर्माण में भू भाग छोड़कर लगभग दस लाख रुपए ब्यय किया गया था। वर्ष 1975 से 1979 तक यह लगातार 4 वर्षों तक चलता रहा। उसके बाद एक वर्ष बंद होकर पुनः 1980 में इसे चलाया गया। सन् 1989 तक इसे कई बार चलाया और बंद किया गया। उसके बाद इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया। यह लगभग 32 वर्षों से पूरी तरह से बंद पड़ा हुआ है। इसे चलाने के लिए शासन के किसी नेता या प्रशासन का कोई उच्चाधिकारी प्रयास तक नहीं किया।
कोल्ड स्टोरेज बंद होने से खुटहन क्षेत्र के सैकड़ों गांव सहित बदलापुर, सोंधी, सोइथा आदि बिकास खंडो के किसानों को आलू भंडारण के लिए तमाम समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं। वे भंडारण के लिए आलू दूर-दराज के स्टोरों में बिचौलियों के माध्यम से ले जाने के लिए विवश हैं। जिससे किसानों को डेढ़ सौ से दो सौ तक अतिरिक्त व्यय सहन करना पड़ता है। शीतगृह बंद हो जाने से यहां तैनात दर्जनभर से अधिक कर्मचारियों की जहाँ रोजी रोटी छीन गई, वही तीन दशक बीत जाने से अब इसकी दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। मशीनें भी पूरी तरह से खराब हो गई है। अब किसान इसके चलने की उम्मीद भी छोड़ चुके थे। लेकिन पहली बार किसी राजनेता ने इसे प्रमुखता से लिया है। यदि शीतगृह पुनः चालू कराने में विधायक रमेश सिंह कामयाब रहे तो वे स्थानीय किसानों के सर्वहितैषी नेता के रूप में अवश्य जाने जायेगे। क्योंकि आलू यहां के किसानों की एक प्रमुख व्यवसायिक फसल रही है।

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