जौनपुर : योगी सरकार गोशालाओं पर खर्च कर रही लाखों रुपये, नतीजा निल बटे सन्नाटा

जौनपुर : योगी सरकार गोशालाओं पर खर्च कर रही लाखों रुपये, नतीजा निल बटे सन्नाटा

# गोशालाओं की हालत खस्ता, भूख-प्यास और गर्मी से दम तोड़ रहे हैं बेजुबान

जौनपुर।
रवि शंकर वर्मा
तहलका 24×7
                  जिले में गोशालाओं की हालत खस्ता है। छुट्टा पशुओं को ठांव देने के लिए हर महीने सरकार गोशालाओं पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही है। न तो उनके लिए चारे और पानी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही धूप से बचाव के लिए कोई पर्याप्त साधन। हालत यह है कि तपती धूप में भूख प्यास से गायें दम तोड़ रही हैं। कंरजाकला स्थित प्यारेपुर गौशाला में बृहस्पतिवार को एक गाय की मौत हो गई है। जबकि दो बीमार का इलाज चल रहा है।सरकार ने ग्रामीण इलाकों के छुट्टा गोवंशीय पशुओं को गोआश्रय स्थल पहुंचा कर उनके चारे पानी की व्यवस्था करने का निर्देश जिम्मेदारों को दिया है, लेकिन यहां न तो उनके लिए चारे, पानी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही धूप से बचाव के लिए इंतजाम है।

करंजाकला में तीन गोशालाओं का निर्माण कराया गया है। इसमें प्यारे पुर स्थित अस्थायी गोशाला में 100 पशुओं को रखने की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में 120 से अधिक पशु हैं। इसमें एक गाय की बृहस्पतिवार को मौत हो गई है। गौशाला प्रभारी संजीव उपाध्याय ने बताया है कि बृहस्पतिवार को एक गाय की मौत हो गई है। जबकि दो गाय बीमार चल रही है। इनका इलाज कराया जा रहा है। सिंगरामऊ स्थित मल्लूपुर गौशाला में क्षमता से डेढ़ सौ से ज्यादा गोवंश संरक्षित किए गए है। यहां हरे चारे की समुचित व्यवस्था नहीं है। ग्राम प्रधान अमृता ने बताया है कि धूप से बचाव के लिए टिन शेड का निर्माण कराया गया है, लेकिन क्षमता से अधिक पशु रखे गए हैं। इससे परेशानी बढ़ गई है। डोभी क्षेत्र में खलियाखास, पड़रक्षा, उमरी, कछवन, ककरापार में गोशाला का निर्माण कराया गया है। इसमें खलियाखास में 60 पशुओं की रखने की क्षमता के संसाधन है, लेकिन यहां 100 पशु हैं। यह स्थिति अन्य गोशालाओं की है।

धर्मापुर क्षेत्र के चार गांवों में अस्थायी गोशाला बनाया गया है। गोशाला की देखरेख के लिए तैनात धीरू ने बताया है कि भूसा पर्याप्त है, लेकिन पशुओं को हरा चारा नहीं मिल पा रहा है। सेक्रेटरी अरविंद यादव ने बताया है कि पशुओं को हरे चारे की व्यवस्था की जा रही है। बेजुवानों को खाने के लिए सूखा चारा डाला जा रहा था। हरा चारा इन्हें नसीब नहीं हो पा रहा है। गौरा बादशाहपुर के सरसौड़ा गांव में बनाई गई अस्थायी गोशाला में 65 पशु रखे गए हैं। सुरेरी भानपुर और सरायडीह गांव में गौशाला बनाने के लिए स्थान चिह्नित किए गए हैं। ब्लॉक प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि भानपुर में जगह अभी चिह्नित नहीं किया गया है, जबकि सरायडीह में 15 अप्रैल के बाद कार्य चालू कर दिया जाएगा। डोभी क्षेत्र पंचायत डोभी के नौ न्याय पंचायतों में पांच ग्राम पंचायतों खलियाखास, पड़रछा, उमरी, कछवन, ककरापार में गोशाला का निर्माण कराया गया है। कनौरा में निर्माण जारी है।

पांचों गोशालाओं में चारे पानी की व्यवस्था तो ठीक है, लेकिन क्षमता से अधिक पशु होने से परेशानी हो रही है। खलियाखास में साठ पशुओं की क्षमता के संसाधन है लेकिन सौ पशु हैं। यही स्थिति अन्य गोशालाओं की है।मछलीशहर ब्लाक क्षेत्र के 10 में से 8 न्यायपंचायतों में पशु आश्रय स्थल बनाए गए हैं। सराययुसुफ गांव में पहले से ही गोशाला बनी हुई है, जिसमें 100 से अधिक जानवर रखे गए हैं। इनको खाने के लिए भूसा तो उपलब्ध हैं, किंतु हरे चारे की व्यवस्था नही है। इस संदर्भ में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ राजेश कुमार ने बताया कि आश्रय स्थलों में गोवंशों के चारे पानी के साथ उन्हें धूप और लू से बचाव के लिए इंतजाम करने का निर्देंश दिया गया है। हरे चारे की बुआई के लिए जमीन चिह्नित किया जा रहा है। सूचना मिलने पर बीमार पशुओं का इलाज कराया जाता है।

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