राम मंदिर दान विवाद में नया मोड़: आठ लोगों पर केस दर्ज, एसआईटी ने सरकार को सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट

राम मंदिर दान विवाद में नया मोड़: आठ लोगों पर केस दर्ज,एसआईटी ने सरकार को सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट

अयोध्या। 
तहलका 24×7 
               राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे के क गबन एवं अनियमितताओं का मामला अब निर्णायक दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है।मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। इसी बीच मामले में आठ लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होने से पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है।हालांकि जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है।
एसआईटी पिछले कई दिनों से मंदिर की दान संग्रह व्यवस्था,दान पेटिकाओं की निगरानी,नकदी की गिनती, अभिलेखों तथा संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।जांच टीम ने बड़ी संख्या में लोगों के बयान दर्ज किए हैं और सीसीटीवी फुटेज समेत कई डिजिटल साक्ष्य भी अपने कब्जे में लिए हैं।सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया गया है,जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच शिकायत के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।आरोप है कि दान और चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं तथा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन के रखरखाव में नियमों का पालन नहीं किया गया।पुलिस और एसआईटी अब दर्ज मुकदमे के आधार पर आरोपियों की भूमिका की अलग से पड़ताल कर रही है।
राजनीतिक स्तर पर भी मामला लगातार गर्माता जा रहा है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है।वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।उधर मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की गई।न्यायालय ने याचिकाकर्ता को 29 जून को पुनः उल्लेख करने की अनुमति दी है।
विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम भी चर्चा में बना हुआ है। हालांकि 25 जून तक उनके इस्तीफे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही ट्रस्ट अथवा सरकार की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा की गई है।उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार वह अभी भी ट्रस्ट के महासचिव के पद पर कार्यरत हैं।
अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदम पर टिकी हैं।जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनियमितताओं के लिए किसकी जिम्मेदारी तय होती है।फिलहाल आठ नामजद आरोपियों में चार लोगों की गिरफ्तारी पुलिस ने करते हुए पूछताछ में जुटी रही।
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