कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर डीएम का आधा वेतन रोकने का निर्देश
# तहसीलदार मछलीशहर को कारण बताओ नोटिस,22 अप्रैल को अगली सुनवाई
जौनपुर।
एखलाक खान
तहलका 24×7
सड़क दुर्घटना से जुड़े एक मामले में क्षतिपूर्ति की धनराशि की वसूली न कराने पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के न्यायाधीश मनोज कुमार अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाया है।कोर्ट ने जिलाधिकारी के कृत्य को आपत्तिजनक मानते हुए कमिश्नर वाराणसी को उनका आधा वेतन रोकने का निर्देश दिया,साथ ही तहसीलदार मछलीशहर को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई के लिए मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट को क्यों न संदर्भित किया जाए।

मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को तय की गई है।
मामला सुजानगंज क्षेत्र के फत्तूपुर निवासी रामलाल से जुड़ा है,जो 16 फरवरी 2019 को मोटरसाइकिल से ससुराल जाते समय एक टेंपो की टक्कर से गंभीर रुप से घायल हो गए थे।हादसे में उनका पैर कई स्थानों पर टूट गया और इलाज में लाखों रुपये खर्च हुए।पीड़ित ने टेंपो मालिक गुलाम हसन निवासी लाई मंडी, साहबगंज मुंगराबादशाहपुर एवं बीमा कंपनी‘द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी’के खिलाफ क्षतिपूर्ति का वाद दाखिल किया था।

सुनवाई के बाद न्यायालय ने 21 जनवरी 2025 को आदेश दिया कि चूंकि वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था,इसलिए बीमा कंपनी उत्तरदायी नहीं होगी और वाहन स्वामी को 1.60 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के साथ वर्ष 2019 से 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करना होगा।कोर्ट के आदेश के बावजूद वाहन स्वामी द्वारा भुगतान नहीं किया गया।

इस पर न्यायालय ने वसूली के लिए आरसी जारी किया,लेकिन तहसीलदार मछलीशहर द्वारा न तो वसूली कराई गई और न ही कोई स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया।न्यायालय ने पहले तहसीलदार का आधा वेतन रोकने का आदेश दिया था,लेकिन जिलाधिकारी द्वारा इस संबंध में कोई आख्या प्रस्तुत नहीं की गई और न ही आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया गया।इसे गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने अब जिलाधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए उनका आधा वेतन रोकने का निर्देश जारी किया है।

















