जस्टिस वर्मा ने हाईकोर्ट जज के रूप में ली शपथ, गुपचुप तरीके ली गई शपथ पर बार ने जताई नाराजगी

जस्टिस वर्मा ने हाईकोर्ट जज के रूप में ली शपथ, गुपचुप तरीके ली गई शपथ पर बार ने जताई नाराजगी

प्रयागराज।
तहलका 24×7
            दिल्ली हाईकोर्ट से स्थानांतरित न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश की शपथ दिलाई गई। शपथ ग्रहण के बाद हाईकोर्ट की वेबसाइट पर इसकी जानकारी दी गई। जस्टिस वर्मा का नाम वरिष्ठता क्रम में आठवें स्थान पर शामिल किया गया है।बताया जा रहा है कि परंपरा से हटकर चीफ जस्टिस के चैंबर के पास स्थित लाइब्रेरी में सुबह ली गई शपथ में हाईकोर्ट के गिने चुने जज ही शामिल हुए, जबकि बार को इसकी सूचना या आमंत्रण भी नहीं दिया गया।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस शपथ ग्रहण की निंदा की है। दूसरी ओर दिल्ली और उड़ीसा हाईकोर्ट से स्थानांतरित होकर आ रहे दो अन्य न्यायाधीशों की सोमवार को होने वाले शपथ समारोह के लिए हाईकोर्ट बार और एडवोकेट्स एसोसिएशन को आमंत्रित किया गया है।हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने गुप्त तरीके से शपथ ग्रहण की निंदा करते हुए कहा कि जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद में हाईकोर्ट में वापस भेजे जाने के खिलाफ हमारे विरोध को देखते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश ने बार के सदस्यों से मुलाकात की।
जिसमें आश्वासन दिया कि न्यायिक प्रणाली की गरिमा को बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। ये बताया गया कि यह जांच युद्ध स्तर पर की जा रही है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि सबूतों से छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट न किया जाए और इसके बाद भी जस्टिस यशवंत वर्मा को गुप्त तरीके से शपथ ग्रहण करा दी गई। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा कि ये शपथ देश के संविधान के विरुद्ध है, इसलिए एसोसिएशन के सदस्य असंवैधानिक शपथ से जुड़ना नहीं चाहते। बार ये समझने में विफल रही कि ये शपथ गुप्त क्यों ली गई।
बार को ये समझाया गया कि व्यवस्था निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हर कदम उठा रही है, लेकिन इस शपथ की सूचना बार को क्यों नहीं दी गई। ये एक ऐसा प्रश्न है जिसने फिर से न्यायिक व्यवस्था में लोगों के विश्वास को खत्म कर दिया है। जिस तरह से न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को बार की पीठ पीछे शपथ दिलाई गई, उसकी स्पष्ट रूप से निंदा की जाती है।हाईकोर्ट बार महासचिव विक्रांत पांडेय ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर कहा कि शपथ ग्रहण परंपरागत और निरंतर खुली अदालत में होता रहा है। अधिवक्ता समुदाय को इस बारे में जानकारी न देने से उनका इस संस्था में विश्वास खत्म हो सकता है।
उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वे मौलिक मूल्यों की रक्षा करें और इस संस्था की परंपराओं का पालन करें। विक्रांत पांडेय ने पत्र में लिखा, अधिकांश न्यायाधीशों को भी उक्त शपथ में आमंत्रित/सूचित नहीं किया गया। इस प्रकार कानूनी और पारंपरिक रूप से न्यायमूर्ति वर्मा को दिलाई गई शपथ भ्रामक व अस्वीकार्य है। उन्होंने उक्त घटना की निंदा करते हुए मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को कोई प्रशासनिक या न्यायिक कार्य न सौंपें।
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