
आज तालाब व पोखरों में धूल उड़ रही है ऐसी स्थिति में जहां चिलचिलाती धूप में लोगो का जीवन बेहाल है तो वही एक बूंद पानी के लिए पशु-पक्षियों को दूर दूर भटकना पड़ रहा है। कभी कभी तो गावों के अंदर घुसकर अपनी प्यास बुझाने चले आते है पर अफसोस होता है कि लाखो की लागत से तैयार किये गये तालाब पोखरों की स्थिति बद से बदतर हो गया है। मगर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान सूखे पड़े तालाब व नहरों की तरफ नही पड़ रहे हैं जब इस संबंध में वीडियो अनिल कुमार कुशवाहा से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बताया कि तालाबों व पोखरों में पानी की उपलब्धता तभी हो सकती है जब नहरों में पानी आये जाये या तो बारिश हो जाये तभी हो पायेगी एक दो दिन का इंतजार करिए बारिश जरूर होगी। उन्होंने कहा कि तालाब भरने के लिए ऐसा कोई बजट नहीं है जिससे तालाब भरा जा सके अगर इस तरह का कोई निर्देश आता है तो भरवा दिया जायेगा। क्या चिलचिलाती धूप में पशु-पक्षियों को अपनी प्यास बुझाने के लिए बारिश का इंतजार करना चाहिए ?बहरहाल कब और कैसे पोखरों व तालाबों में पानी भरा जायेगा ये तो जिम्मेदार ही तय करेंगे।