जौनपुर : शाहगंज सीट अनारक्षित होते ही बदली चुनाव की फिजा

जौनपुर : शाहगंज सीट अनारक्षित होते ही बदली चुनाव की फिजा

# सबकी निगाहें भाजपा के टिकट पर

# क्या अग्रहरि वोट बदल पाएंगे समीकरण?

शाहगंज। 
रवि शंकर वर्मा 
तहलका 24×7
                  निकाय चुनाव के लिए अध्यक्ष पद पर आरक्षण की घोषणा और शाहगंज को अनारक्षित किए जाते ही अभी तक लगाए जा रहे सारे कयास बेमतलब लगने लगे हैं। सबकी निगाहें भारतीय जनता पार्टी के टिकट बंटवारे पर टिक गई हैं। अग्रहरि बाहुल्य सीट होने के चलते मुमकिन है कि पार्टी इस बार किसी अग्रहरि को अध्यक्ष पद पर लड़ने का मौका दे। अभी तक बेमन से चुनावी तैयारी कर रहे कुछ चर्चित चेहरे भी अब अचानक सक्रिय दिख रहे हैं।

# क्या है वोटों की गणित

शाहगंज नगर पालिका की मतदाता संख्या पिछली बार से 1448 मतदाता संख्या बढ़कर कुल 24003 हो गई है। एक अनुमान के मुताबिक शाहगंज नगर में अग्रहरि वोटरों की तादाद कुल वोटर संख्या का 15 से 20 प्रतिशत है। वर्ष 2017 में आरक्षण की घोषणा से पहले कई अग्रहरि उम्मीदवारों ने तैयारी करके रखी थी। सीट पिछड़ा महिला होने से सारी तैयारी धरी रह गई। इस बार अनारक्षित होने की घोषणा के साथ ही इस जाति विशेष के कई नाम चुनाव में ताल ठोंकते दिखने लगे हैं। 

# 2012 में सीट थी सामान्य 

इससे पहले वर्ष 2012 के चुनाव में भी सीट अनारक्षित थी। भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व चेयरमैन ओमप्रकाश जायसवाल या उनके परिवार की बजाय नीलम नंदन अग्रहरि पर दांव लगाया था। नया और निष्क्रिय चेहरा होने की वजह से नीलम को पार्टी के तमाम क्षत्रपों का सहयोग नहीं मिल सका और नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायी जितेंद्र सिंह ने बाजी मारी। 2017 में सीट पिछड़ा महिला हुई तो टिकट वापस ओमप्रकाश जायसवाल के परिवार में आया और उनकी भयोहू गीता जायसवाल ने लड़कर चुनाव जीता। 

# भाजपा के टिकट पर दावेदारों का हुजूम

नगर में सबसे ज्यादा खींचतान कमल निशान के लिए दिख रही है। मौजूदा चेयरमैन के पति प्रदीप जायसवाल के अलावा कद्दावर नेता अनिल मोदनवाल का नाम सर्वोपरि बताया जा रहा है। अनारक्षित होने के बाद गल्ला मंडी के एक बड़े व्यवसायी और चर्चित अग्रहरि चेहरे के मैदान में आने की चर्चा भी खासी गरम है। इसके अलावा वर्तमान मंडल अध्यक्ष सुनील अग्रहरि को लोग छिपा रुस्तम की तरह देख रहे हैं।

# भाजपा, सपा और बसपा के प्रत्याशियों पर टिकी निगाहें

शाहगंज में हाल के सालों में पहली बार ऐसा होने जा रहा है, जब मुख्य लड़ाई भाजपा और सपा के बीच रहने वाली है। पूर्व चेयरमैन जितेंद्र सिंह के बेटे वीरेंद्र सिंह बंटी के पोस्टर पर साइकिल चुनाव चिन्ह छपने लगा है। लोग मानकर चल रहे हैं कि भाजपा से जो भी उम्मीदवार होगा, वो कड़ी टक्कर देगा। इसके अलावा बसपा से अंदरखाने एक पूर्व चेयरमैन को टिकट मिलने की चर्चा जोरों पर है।
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