धर्म की रक्षा और पापियों के नाश के लिए प्रभु लेते हैं अवतार- आचार्य निर्मल शरण

धर्म की रक्षा और पापियों के नाश के लिए प्रभु लेते हैं अवतार- आचार्य निर्मल शरण

खुटहन।
संतलाल सोनी
तहलका 24×7
                पृथ्वी पर जब-जब राक्षसी प्रवृत्ति का अत्याचार पाप बढ़ा। पूजा-पाठ, जप, तप व सत्ककर्मो में आसुरी शक्तियों ने बिघ्न और बाधाएं डाली, तब तब प्रभु किसी न किसी स्वरूप में पृथ्वी पर अवतरित होकर अधर्मियों का नाश कर धर्म की स्थापना किए है। कंस का अत्याचार जब असह्य हो गया। पृथ्वी मां भी उसके पापकर्मो से मर्माहत हो गई। तब प्रभु श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ। भगवान ने सभी पापियो का नाश कर फिर से धर्मयुग का शुभारंभ किया। उक्त बातें रविवार की रात उसरौली शहाबुद्दीनपुर गांव में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा में जुटे श्रद्दालुओं को संबोधित करते हुए श्री धाम अयोध्या से पधारे निर्मल शरण जी महराज ने कही।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत सबसे प्राचीन धर्म ग्रन्थ है। इसके श्रवण, मनन, वाचन और आचरण में समाहित कर लेने मात्र से मानव भव को पार हो जाता है। यह हमें सत्कर्म की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन बड़े भाग्य से मिला है। इसे ब्यर्थ में न गवांये। गृहस्थ आश्रम का पालन करते हुए उस परम पिता का स्मरण करते रहिए। सबसे बड़ा पूण्य कर्म है सत्कर्म। मात्र इसे अपने जीवन चरित्र में धारण कर मानव ईश्वर को आसानी से प्राप्त कर सकता है। झूठ मत बोलो, बेईमानी से बचो, ईर्ष्या द्वेष और अहंकार को पास मत आने दो। आपका स्वतः ही कल्याण हो जायेगा। इस मौके पर बीरेंद्र मिश्रा, छोटेलाल मिश्रा, ईश नारायण पाण्डेय, अजय सिंह राजू, लालमणि शुक्ला, दिनेश जोरिया, जितेंद्र मिश्रा आदि मौजूद रहे। आगन्तुकों के प्रति आयोजक त्रिवेणी मिश्रा ने आभार प्रकट किया।
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