धर्म की रक्षा और पापियों के नाश के लिए प्रभु लेते हैं अवतार- आचार्य निर्मल शरण
खुटहन।
संतलाल सोनी
तहलका 24×7
पृथ्वी पर जब-जब राक्षसी प्रवृत्ति का अत्याचार पाप बढ़ा। पूजा-पाठ, जप, तप व सत्ककर्मो में आसुरी शक्तियों ने बिघ्न और बाधाएं डाली, तब तब प्रभु किसी न किसी स्वरूप में पृथ्वी पर अवतरित होकर अधर्मियों का नाश कर धर्म की स्थापना किए है। कंस का अत्याचार जब असह्य हो गया। पृथ्वी मां भी उसके पापकर्मो से मर्माहत हो गई। तब प्रभु श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ। भगवान ने सभी पापियो का नाश कर फिर से धर्मयुग का शुभारंभ किया। उक्त बातें रविवार की रात उसरौली शहाबुद्दीनपुर गांव में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा में जुटे श्रद्दालुओं को संबोधित करते हुए श्री धाम अयोध्या से पधारे निर्मल शरण जी महराज ने कही।


















