न्याय और धर्म के प्रहरी थे भगवान परशुराम : ओमप्रकाश दुबे

न्याय और धर्म के प्रहरी थे भगवान परशुराम : ओमप्रकाश दुबे

खेतासराय, जौनपुर। 
अजीम सिद्दीकी
तहलका 24×7
               बभनौटी मोहल्ला स्थित रामलीला मैदान में मंगलवार को भगवान परशुराम जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं और नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रुप में बदलापुर के पूर्व विधायक ओमप्रकाश दुबे उर्फ बाबा दुबे और विशिष्ट अतिथि विद्यालय प्रबंधक अनिल कुमार उपाध्याय रहे।कार्यक्रम की शुरुआत भगवान परशुराम की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण से हुई।
इस दौरान अतिथियों ने भगवान परशुराम के जीवन और आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि ओमप्रकाश दुबे ने कहा हमने कभी किसी को तिरस्कृत नहीं किया। रैदास हों या श्रीरामचन्द्र जी, हमने सबको भगवान माना। परशुराम के कारण ही हमारी धरती और वंशजों की रक्षा हुई। जब उनके पिता की हत्या हुई, तब उनकी माता ने 21 बार विलाप किया और तब परशुराम ने संकल्प लिया कि हर्यक वंश के अत्याचारी क्षत्रियों का विनाश करेंगे, न कि पूरे क्षत्रिय समाज का।
विशिष्ट अतिथि अनिल कुमार उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि हमें गर्व है कि भगवान परशुराम ब्राह्मण कुल में जन्मे। जीवन के प्रत्येक संस्कार में ब्राह्मण की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। नामकरण से लेकर अंत्येष्टि तक। एक व्यक्ति में दिनभर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र के गुण काम करते रहते हैं। पूर्व मंडल अध्यक्ष धर्मेंद्र मिश्रा, डॉ. अशोक पाण्डेय, प्यारे मोहन श्रीवास्तव, डॉ. गजेन्द्र पाण्डेय, रविंद्र मिश्रा ने भी भगवान परशुराम के जीवन पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन जगदम्बा प्रसाद पाण्डेय ने किया, अंत में आयोजक वीरेंद्र पाण्डेय ने अतिथियों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।इस अवसर पर मंडल महामंत्री मनीष गुप्ता, शांतिभूषण मिश्रा, रामबाबू पाण्डेय, मंडल अध्यक्ष उपेन्द्र मिश्रा, बागीश तिवारी, डा.गजेंद्र पाण्डेय, अवधेश पाण्डेय, सोनू अवस्थी, रविन्द्र पाण्डेय, वंश श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
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