राजभाषा का दर्जा पाने के इंतजार में भोजपुरी- विनोद कुमार
# भोजपुरी की बदौलत वैश्विक प्रसिद्धि पाने वाले सितारे भी है मौन
# भोजपुरी को आठवीं सूची में दर्ज कराने के लिए हर संघठन को आना होगा आगे
स्पेशल डेस्क।
रवि शंकर वर्मा
तहलका 24×7
भारत विभिन्न वेषभूषा, संस्कृति, रहन-सहन और बोली-भाषा वाला देश है। देश के अलग अलग क्षेत्रों में बोली जानी वाली भाषाओं का अपना ही आत्मीय महत्त्व है। क्षेत्रीय भाषा के आधार पर बात-विचार-व्यवहार भी निर्धारित किया जाता है। भारत में बोली जाने वाली भाषाओं में जो मिठास है वह दुनिया में अन्यत्र कहीं भी नहीं है। भाषाएं भारतीय संस्कृति और सभ्यता का केंद्र बिंदु रहीं हैं। इन्हीं भाषाओं के बीच पूर्वोत्तर भारत में बोली जाने वाली एक समृद्ध भाषा भोजपुरी भी है जो भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपना एक अहम स्थान रखती है। मगर हर बार भोजपुरी भाषा का दरकिनार किया गया।
उक्त विषय पर अपनी बात रखते हुए पत्रकार विनोद कुमार ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि देश के सबसे बड़े हिंदी भाषी राज्य उत्तर प्रदेश जहां भोजपुरी भाषा का भी बोलबाला है। यहां के तीन मूल निवासी रविकिशन (गोरखपुर), दिनेश लाल (आजमगढ़) और मनोज तिवारी (दिल्ली) संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं लेकिन भोजपुरी भाषा के मुद्दे पर एक शब्द भी बोलने को राजी नहीं हैं जबकि ये तीनों सांसद भोजपुरी भाषा की ही बदौलत आज देश की सर्वोच्च संस्था में शामिल हैं। भोजपुरी भाषा को समृद्धशाली बनाने की जिम्मेदारी सड़क से लेकर संसद उनकी जिम्मेदार बनती है। इसी भाषा की बदौलत भोजपुरी सितारे दुनिया भर में अपनी उपस्थिति दर्ज करते हुए ख्याति अर्जित की कर मान- सम्मान, यश- कीर्ति प्राप्त की है।
























