वक्फ संशोधन विधेयक के राजनीतिक मायने, उसके फायदे और नुकसान!

वक्फ संशोधन विधेयक के राजनीतिक मायने, उसके फायदे और नुकसान! 

# पिछले साल अगस्त महीने से वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर मचे घमासान के फाइनल राउंड में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी एवं संसद से बाहर जाना और अखिलेश यादव का वक्फ के मुद्दे को छोड़कर अनर्गल प्रलाप शायद यही दर्शता है कि उनके पास बोलने को कुछ नहीं था या जानकारी का अभाव रहा। 

कैलाश सिंह
राजनीतिक संपादक
दिल्ली/लखनऊ। 
तहलका 24×7
                दो अप्रैल 2025 ऐतिहासिक तारीख बन गई, जिस दिन देश की आजादी के बाद से 77 साल से चल रही राजनीति के मायने बदल गए। जो कांग्रेस और बाद में सपा मुस्लिम वोटबैंक के सहारे सत्ता सुख लेती रही, उसी पार्टी के नेताओं में राहुल गांधी की संसद में चुप्पी और फ़िर बाहर चले जाने तथा अखिलेश यादव का वक्फ संशोधन विधेयक की बजाय अनर्गल प्रलाप ने मुस्लिम समाज की नज़र में उन्हें संदेहास्पद बना दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक दोनों दलों कांग्रेस और सपा एवं उनके नेताओं राहुल गांधी और अखिलेश यादव का वक्फ संशोधन विधेयक पर तथ्य के साथ न बोल पाना उनकी समझ को दर्शाता है। सत्ताधारी दल भाजपा के बाद संसद सदस्यों की संख्या के मद्देनज़र यही दोनों दल दूसरे और तीसरे नम्बर पर हैं। इसलिए संसद सत्र में इनके बोलने के मायने देश की जनता और समूचे मुस्लिम समाज के लिए अधिक अहमियत रखते हैं। इन्हीं नेताओं के वक्तव्य पर ‘चातक पक्षी’ सरीखे मुस्लिम समाज का अशराफिया वर्ग नज़र गड़ाये था, क्योंकि गरीब व सामान्य मुसलमान तबके को वक्फ की जमीनों से कोई फायदा या नुकसान नहीं था।
इसी तरह भाजपा को भी मुस्लिम वोटबैंक के अपने पक्ष में आने या जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है, जिन्हें सर्वाधिक फर्क पड़ेगा वह है कांग्रेस और सपा समेत तमाम विपक्षी क्षेत्रीय दल। इनमें से दो बड़े दलों कांग्रेस और सपा ने मिले मौके को गंवा दिया। नेता प्रतिपक्ष के तौर पर संसद में बोलने से रोकने का आरोप सत्ता पक्ष भाजपा पर मढ़ने वाले राहुल गांधी की चुप्पी ने मुस्लिम समाज के जेहन में संदेह के बीज बो दिये। इसी तरह अखिलेश यादव वक्फ विधेयक से इतर वह सबकुछ बोले जिसकी उपयोगिता नहीं थी, ‘जैसे भाजपा के अध्यक्ष की नियुक्ति और यूपी के सीएम योगी के बने रहने या हटने का सवाल करना उनकी समझ और ‘मन के डर’ को दर्शा गया।

# क्या है वक़्फ़ संशोधन विधेयक

वक़्फ़ को लेकर वर्ष 2013 में जो खतरनाक संशोधन कांग्रेस की सरकार ने ‘सेक्शन 40 के जरिये किया था कि वक्फ बोर्ड चाहे जिस सम्पत्ति को वक्फ की घोषित कर सकता है, उसपर कोर्ट में भी कोई सुनवाई नहीं होगी। केंद्र सरकार ने संशोधन विधेयक में उसी सेक्शन 40 को खत्म कर दिया। यही सबसे बड़ा बदलाव हुआ है। चर्चा के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि वक्फ बोर्डों द्वारा एक लाख 38 हजार एकड़ जमीन किराये पर दिये जाने, सौ साल की लीज पर निजी संस्थानों को देने से गरीब मुसलमान को क्या फायदा मिला? 
संसद में विपक्षी नेताओं को उम्मीद थी कि इस मामले में एनडीए के साथ वाले दल चंद्र बाबू नायडू के टीडीपी और नीतीश कुमार के जद यू विरोध में नज़र आयेंगे, लेकिन ऐसा नहीं होने पर इंडी गठबंधन की बाकी पार्टियां भी बैकफुट पर नजर आने लगीं।
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