सुल्तानपुर : साहित्य के पास वह आंख है जो समाज के भीतर देखती है- प्रोफेसर राधेश्याम सिंह

सुल्तानपुर : साहित्य के पास वह आंख है जो समाज के भीतर देखती है- प्रोफेसर राधेश्याम सिंह

# राणा प्रताप पीजी कालेज में चल रही छह दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का समापन 

सुल्तानपुर।
मुन्नू बरनवाल 
तहलका 24×7 
             साहित्य हमें इन्सानियत सिखाता है। साहित्य के पास वह आंख है जो समाज के भीतर देखती है। साहित्य मानव का हित करने वाली शब्द सम्पदा है।’ उक्त बातें केएनआई के पूर्व प्राचार्य वरिष्ठ आलोचक प्रोफेसर राधेश्याम सिंह ने कहीं। वे राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय में चल रही भारतीय ज्ञानपीठ व वाणी प्रकाशन समूह की छह दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी के समापन समारोह को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित कर रहे थे।
 हिंदी विभाग द्वारा ‘साहित्य क्यों पढ़ें’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए चर्चित साहित्यिक पत्रिका अभिदेशक के सम्पादक वरिष्ठ साहित्यकार डॉ ओंकारनाथ द्विवेदी ने कहा कि साहित्य में सभी विषय समाहित हैं। भारत का लोक जीवन कभी साहित्य से अलग हो ही नहीं सकता। प्राचार्य प्रोफेसर दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि साहित्य को कोई नष्ट नहीं कर सकता। वाणी प्रकाशन की इस पुस्तक प्रदर्शनी ने मेरे अंदर साहित्य पढ़ने की ललक पैदा की है। पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर एम.पी.सिंह ने कहा कि साहित्य खुद को समझने और जगत को समझाने का काम करता है। उप प्राचार्य प्रोफेसर निशा सिंह ने कहा कि साहित्य हमें अपनी आत्मा से जोड़ता है। जो सत्य शिव और सुंदर को प्रतिष्ठित करता है वह साहित्य है।
स्वागत हिन्दी विभागाध्यक्ष इन्द्रमणि कुमार व संचालन प्रदर्शनी संयोजक असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने किया। आभार ज्ञापन वाणी प्रकाशन के प्रतिनिधि प्रदर्शनी प्रभारी लोकेश कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर प्रोफेसर शैलेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ.अभय सिंह, डॉ आलोक पाण्डेय, डॉ विभा सिंह, डॉ नीतू सिंह, डॉ शाहनवाज आलम व डॉ राजेश पाण्डेय सहित अनेक प्रमुख व्यक्ति मौजूद रहे।
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