आजमगढ़ : विडम्बना ! कभी करते थे आचमन अब स्पर्श करने का भी नहीं होता मन

आजमगढ़ : विडम्बना ! कभी करते थे आचमन अब स्पर्श करने का भी नहीं होता मन

मेहनाजपुर।
फैज़ान अहमद
तहलका 24×7
               बाजार स्थित श्रीराम-जानकी, शिव मंदिर का जलाशय उपेक्षा और लोगों की मनमानी का शिकार हो गया है। कभी इसके पानी से मंदिर आने वाले लोग आचमन करते थे, लेकिन जो स्थिति है उसमें उसके जल को स्पर्श करने तक का मन नहीं होता। कारण कि पानी के नाम पर घरों के नाबदान का गंदा पानी उसमें मिला दिया गया है। दुर्गंध इतनी कि उधर से गुजरने वालों को नाक बंद करना पड़ जाता है।जलाशय को चारों तरफ से कूड़े-कचरे से पाट दिया गया है। देखकर यह लगता है कि यहां कोई जलाशय नहीं, बल्कि कूड़े कचरे का डंपिग स्थल है।

चारों तरफ से नाबदान और शौचालय का पानी बहाया जाता है। तहसील प्रशासन ने भी कभी इस तरफ ध्यान नहीं दिया। कभी स्वच्छ जल के लिए इस जलाशय का लोग नाम लिया करते थे। इसी के जल से मंदिर की सफाई होती थी और भोग लगाने के लिए भोजन बनाया जाता था। पूजा-पाठ में इसी के जल से आचमन होता था। धार्मिक यात्राएं यहां रुकती थीं, तो बाकी राहगीर मंदिर पर विश्राम करते थे और जलाशय के जल को पीकर कर अपनी प्यास बुझाया करते थे। यह बातें गुजरे जमाने की हो गई हैं। अब तो नाबदान और शौचालय का पानी बहाने से इसकी सूरत ही बिगड़ गई है। गुजरने वाले राहगीर अपनी नाक ढक लेते हैं। राजस्व विभाग भी इसकी सूची नहीं बनाता। सरकार बनी तो लोगों को आस जगी थी कि जलाशय का पुनरोद्धार हो जाएगा और फिर से अपने पुराने स्वरूप में आ जाएगा, लेकिन वह सपना पूरा नहीं हो सका।
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