कोलकाता हादसा: ‘मां, गरीबी दूर करने जा रहा हूं…’ कहकर गया बेटा, ताबूत में लौटा, मुंगेर में एक साथ उठीं तीन अर्थियां

कोलकाता हादसा: ‘मां,गरीबी दूर करने जा रहा हूं…’कहकर गया बेटा,ताबूत में लौटा,मुंगेर में एक साथ उठीं तीन अर्थियां

मुंगेर। 
तहलका 24×7 
               पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला क्षेत्र में हुए हादसे में जान गंवाने वाले बिहार के मुंगेर जिले के तीन मजदूरों के शव शुक्रवार को उनके पैतृक गांव पहुंचे।शव पहुंचते ही गांव में मातम छा गया। परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया और अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
मृतकों में धरहरा प्रखंड के लगमा गांव निवासी पप्पू राम का पुत्र शिरचन कुमार (18),राजेंद्र राम का पुत्र प्रेम कुमार (18) तथा मानगढ़ गांव निवासी जवाहर राम का पुत्र नवीन राम (40) शामिल हैं।
शिरचन और प्रेम आपस में चचेरे भाई थे।दोनों की एक साथ मौत से गांव में शोक की लहर है।बताया गया कि प्रेम कुमार के पिता राजेंद्र राम अपने चार बेटों के साथ कोलकाता में निर्माण कार्य में मजदूरी कर रहे थे।हादसे में प्रेम की मौत हो गई,जबकि राजेंद्र राम और परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रुप से घायल हो गए।सभी का उपचार कोलकाता के अस्पताल में चल रहा है।शिरचन कुमार की मां बेबी देवी बेटे का शव देखकर बेसुध हो गईं।
वह बिलखते हुए कहती रहीं,”मेरा बेटा घर की गरीबी दूर करने के लिए कमाने गया था,लेकिन आज उसका शव वापस आया है।”वहीं प्रेम कुमार की मां नीरा देवी का भी रो-रोकर बुरा हाल था।परिजनों के अनुसार,शिरचन के पिता ओडिशा में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।बेटे की मौत की सूचना मिलते ही वह गांव पहुंचे और शव देखकर फूट-फूटकर रो पड़े।दूसरी ओर,नवीन राम की पत्नी पति के शव से लिपटकर विलाप करती रहीं।
उन्होंने कहा कि अब उनके छोटे-छोटे बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है और परिवार का सहारा छिन गया।ग्रामीणों और परिजनों ने राज्य सरकारों से मृतकों के आश्रितों को आर्थिक सहायता,परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा घायलों के बेहतर इलाज की मांग की है।उनका कहना है कि रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और निर्माण कंपनियों की जिम्मेदारी है। यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता,तो यह हादसा टाला जा सकता था।
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