राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में जांच का दायरा बढ़ा,व्यवस्था पर भी उठे सवाल
अयोध्या।
तहलका 24×7
राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान अनियमितताओं और चोरी के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।अब जांच केवल संदिग्ध कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह गई है,बल्कि चढ़ावा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई है।सूत्रों के अनुसार,मंदिर में चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।

जानकारी सामने आई है कि कर्मचारियों की नियुक्ति एक आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से की गई थी,जबकि कर्मचारियों के चयन में मंदिर ट्रस्ट की भूमिका भी बताई जा रही है।ऐसे में यह जांच का विषय बन गया है कि संवेदनशील जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों का चयन किन मानकों पर किया गया था।रिपोर्टों के मुताबिक,चढ़ावे की गिनती में लगे कर्मचारियों का पर्याप्त सत्यापन,नियमित तलाशी और प्रभावी निगरानी व्यवस्था नहीं थी।

ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी पहचान पत्र के आधार पर परिसर में आसानी से आवागमन करते थे।वहीं,मंदिर परिसर में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती के बावजूद आंतरिक गतिविधियों की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।जांच में यह भी सामने आया है कि जिन कर्मचारियों पर संदेह जताया गया है,उनका मासिक वेतन 12 से 18 हजार रुपये के बीच था।इसके बावजूद उनके पास मिली नकदी,संपत्ति और निवेश के स्रोतों की पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति में अचानक वृद्धि कैसे हुई।सबसे महत्वपूर्ण पहलू चढ़ावे के वास्तविक हिसाब किताब से जुड़ा है।बताया जा रहा है कि दानपात्रों में आने वाली नकदी का प्रारंभिक आंकड़ा पहले से दर्ज नहीं होता था। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि गिनती के दौरान किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई हो तो वास्तविक नुकसान का आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल जांच एजेंसियां कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया,निगरानी व्यवस्था और चढ़ावे के लेखा-जोखा से जुड़े सभी पहलुओं की गहन पड़ताल कर रही हैं। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी अनियमितता या गबन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


















