जमीन कब्जे का आरोप निराधार, छवि खराब करने वाले पर करुंगा मानहानि का केस: सुजीत जायसवाल 

जमीन कब्जे का आरोप निराधार, छवि खराब करने वाले पर करुंगा मानहानि का केस: सुजीत जायसवाल 

# सभासद पति कृष्ण कांत ने कहा- जमीन खरीदने पर की जा रही है डेढ़ करोड़ रुपए की मांग 

शाहगंज,जौनपुर।
एखलाक खान 
तहलका 24×7
            संपूर्ण समाधान दिवस पर शनिवार को जिलाधिकारी को पत्रक देकर जमीन हड़पने का आरोप लगाने वाले रितेश जायसवाल के आरोपों को फर्जी और निराधार बताते हुए कारोबारी सुजीत जायसवाल व सभासद पति कृष्ण कांत सोनी ने रविवार को पत्रकार वार्ता कर छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया। कहा उनपर या उनके परिवार पर लगाए गए सभी आरोप गलत हैं।आरोप लगाने वाले पर कानूनी कार्रवाई निश्चित है।
सुजीत जायसवाल ने कहा कि आरोप लगाने वाले रितेश जायसवाल को व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में कुछ लोगों द्वारा मोहरा बनाकर मेरी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।तालाब और पोखरे की जमीनों पर जिन लोगों की नजर है और कामयाब नहीं हो पा रहे हैं वो इस तरह का काम कर रहे हैं।जिलाधिकारी को पत्रक देकर लगाए गए आरोप के बाबत सुजीत जायसवाल ने बताया कि रितेश जायसवाल के पिता ताड़क राम ने वर्ष 1985 में अपने भाई प्रदीप जायसवाल के साथ रजिस्टर्ड बंटवारा किया था।
जिसने शाहगंज भादी चुंगी स्थित जमीन में 97.8 फुट अपने भाई को देकर शेष 17.6 फुट अपने हिस्से में लिया।इसी जमीन को रितेश अपनी बात रहे हैं, जबकि उनके द्वारा दिए गए दो रेस्टोरेशन को जांच के बाद खारिज किया जा चुका है।उक्त जमीन का मेरे द्वारा प्रदीप जायसवाल से बैनामा लिया गया,नगर पालिका परिषद व तहसील के अभिलेखों में नाम दर्ज होने के बाद किराएदारों से कुछ दुकानों को खाली कराया गया।
जबकि रितेश के पिता की 17.6 फुट जमीन से उनके परिवार के लोगों ने 11 फुट का बैनामा कर दिया,शेष हिस्सा सुरक्षित है जिससे मेरा कोई वास्ता सरोकार नहीं है।सुजीत जायसवाल ने कहा कि जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र की जांच प्रशासन कर रहा है।जांच पूरी होने के बाद छवि धूमिल करने वालों पर मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
वहीं सभासद पति कृष्ण कांत सोनी ने उक्त मामले से कोई लेनदेन न बताते हुए कहा कि जमीन के कुछ हिस्से को मेरे द्वारा बैनामा कराने के लिए सुजीत जायसवाल, प्रदीप जायसवाल व सुधा जायसवाल से पंजीकृत एग्रीमेंट कराया गया है,जिसके बाद से लगातार रितेश के एक सहयोगी जो अंबेडकरनगर के अकबरपुर निवासी खुद को डाक्टर बताते हैं,जो लगातार डेढ़ करोड़ रुपए की मांग करके मामले को रफ़ादफ़ा करने का दबाव बना रहे हैं।
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