जौनपुर : वोटकटवा उम्मीदवारों के भरोसे है जीत की आस

जौनपुर : वोटकटवा उम्मीदवारों के भरोसे है जीत की आस

# शाहगंज विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण में उलझी पार्टियां

शाहगंज।
रवि शंकर वर्मा
तहलका 24×7
                    पूर्वांचल की हॉट सीटों में गिनी जा रही शाहगंज विधानसभा सीट पर लड़ाई जातीय और धार्मिक समीकरणों में उलझकर रह गई है। यह सीट पिछले चार दफे से समाजवादी पार्टी के हिस्से में जाती रही है और इस बार भी सपा को हराने के लिए विपक्षियों के पास उम्मीद के तौर पर जातीय समीकरण ही बचे हैं।
शाहगंज सीट पर यादव, मुस्लिम और निषाद वोटबैंक को निर्णायक माना जाता है । इन तीनों की तादाद 50 हजार के करीब है और बीते चुनावों को आधार मान लिया जाए तो इन तीनों वोटबैंक की गणित के सहारे ही समाजवादी पार्टी यहां से चुनाव जीतती रही है। बीते चुनाव में भाजपा समर्थित सुभासपा प्रत्याशी की 10 हजार से कम वोटों की हार को निषाद पार्टी के प्रत्याशी को मिले 21 हजार वोटों का साइड इफेक्ट माना जाता रहा है। इस बार खुद निषाद पार्टी के उम्मीदवार को भाजपा का समर्थन है लेकिन सुभासपा सपा के पाले में है।
बसपा से इस बार स्थानीय प्रत्याशी इंद्रदेव यादव, कांग्रेस से परवेज आलम भुट्टो और एआईएमआईएम से नायाब अहमद चुनाव लड़ रहे हैं। खास बात यह है कि इन तीनों के निशाने पर सपा प्रत्याशी ललई यादव ही हैं। 1996 के बाद से जीत के लिए तरस रही भाजपा को उम्मीद है कि ये तीनों मिलकर सपा के मुस्लिम-यादव समीकरण को ध्वस्त करेंगे और इनके काटे गए वोट निर्णायक साबित होंगे।
ऐसी ही गणित का सहारा समाजवादी पार्टी को भी है। पिछली बार निषाद पार्टी से लड़े डॉ. सूर्यभान यादव ने हाल में ही पार्टी छोड़ दी और आरक्षण न मिलने की वजह से निषादों में भाजपा से नाराजगी है। माना जा रहा है कि इस बार निषाद वोटबैंक का बड़ा हिस्सा भाजपा से बिदक सकता है और राजभरों का वोट सपा के हिस्से आ सकता है। ऐसे में वीआईपी और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों ने अगर ठीकठाक वोट काटे तो उसका फायदा उठाकर सपा अपना किला बचा सकती है।
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