जौनपुर : सस्ती और प्रदूषण रहित है सौर ऊर्जा- डॉ रितु श्रीवास्तव

जौनपुर : सस्ती और प्रदूषण रहित है सौर ऊर्जा- डॉ रितु श्रीवास्तव

# विज्ञान और तकनीक का एकीकृत प्रयोग सतत विकास के लिए जरूरी- प्रो. निर्मला एस. मौर्य

# भारत ने विकसित किया अपना स्वदेशी नेविगेशन तंत्र- मिर्जा मोहम्मद जहीर

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
                 वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में सोमवार को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परिसर में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें 470 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।

संगोष्ठी में राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला नई दिल्ली की वैज्ञानिक डॉ. रितु श्रीवास्तव ने सतत ऊर्जा के लिए फोटोनिक डिवाइस विषय पर विस्तार से समझाया। फोटोनिक डिवाइस प्रकाश ऊर्जा का सतत और स्वच्छ स्रोत है। डॉ. श्रीवास्तव ने ऑर्गेनिक सोलर सेल पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सोलर ऊर्जा का ही देश में भविष्य है जो कि देश को प्रदूषण मुक्त करने में सहायक होगा। इसमें अधिक उत्पादन और कम लागत भी आएगी।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि विज्ञान और तकनीक के सम्मिलित प्रयास टिकाऊ भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इस मौके पर उन्होंने सी. वी. रमन के जीवन पर भी प्रकाश डाला। कहा कि सिर्फ भारतीयों का पास ही सिद्धांत की अवधारणा स्पष्ट है इस कारण विश्व के जिन भी देश में वे काम के लिए गए वहां उन्होंने वहां देश का नाम रोशन किया।इस मौके पर इसरो लखनऊ के मिर्जा मोहम्मद जहीर ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन विषय पर अपना व्याख्यान दिया। जहीर ने सेटेलाइट के कार्य प्रणाली के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने विश्व भर में प्रयोग हो रहे विभिन्न नेविगेशन सिस्टम के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि इसरो ने नाविक नाम का नेविगेशन सिस्टम बनाया है, जिसे 2019 में मान्यता मिल चुकी है। नाविक की मदद से समुद्री क्षेत्र में मछुआरों को तथा युद्ध के समय में भारतीय सेना को बहुत मदद मिलेगी। इसरो लखनऊ के डॉ दिनेश कुमार मिश्रा ने भारतीय अंतरिक्ष मिशन पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ मिश्रा ने अब तक भारत द्वारा अंतरिक्ष में किए गए अभियानों के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत पहले ही प्रयास में मंगल पर पहुंच गया और चंद्रयान-2 और मंगलयान-1 सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं और समय से हमें सूचना दे रहे हैं।

सेमिनार में रज्जू भैया संस्थान के निदेशक सेमिनार के सह संयोजक प्रो. देवराज सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। इंजीनियरिंग संस्थान के संकायाध्यक्ष सेमिनार के संयोजक प्रो. बी. बी. तिवारी ने संगोष्ठी की विस्तृत रूपरेखा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन रामांशु और धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डा. धीरेंद्र कुमार चौधरी ने किया। इस अवसर पर प्रो. रामनारायण, प्रो अजय द्विवेदी, डॉ. प्रमोद कुमार यादव, डॉ राजकुमार, डॉ संतोष कुमार, डॉ मनोज मिश्रा, डॉ ‌मनीष कुमार गुप्ता, डॉ सुनील कुमार, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ नितेश जायसवाल, डॉ प्रमोद कुमार, डॉ. रजनीश भास्कर, डॉ रविप्रकाश, डॉ. गिरधर मिश्र, डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह, डा. पुनीत धवन, डा. काजल डे, डॉ. प्रवीण सिंह, डॉ.दिव्येंदु मिश्र, सौरभ सिंह, पूनम सोनकर जया शुक्ला, सुधीर सिंह, रितेश बरनवाल व अन्य शिक्षक तथा बड़ी संख्या में छात्र व छात्राएं उपस्थित रहे।

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