कहा जाता है कि शुद्ध मन में ही ईश्वर का वास होता है, अगर आप वाणी चरित्र और कर्म से सात्विक प्रवृत्ति के है तो आप ईश्वर के सबसे निकट हैं, ईश्वर आप में खुद ही विराजमान है। हमारा देश भारत ऋषि मुनियों मनीषियों योगियों तपस्वियों का देश रहा है इनके जप तप में आध्यात्म तो होता ही था यह वैज्ञानिकता से भी परिपूर्ण होता था, आज सारी दुनिया इस बात को मानने के लिए बाध्य हैं कि जिस चीज़ को वैज्ञानिक आज खोज रहे हैं उस चीज को भारतीय मनीषियों ने हजारों वर्ष पहले ही अपनी आध्यात्मिक शक्ति से खोज निकाला था। आज हम इसी विज्ञान और आध्यात्म से सम्बंध रखने वाले नवरात्रि पर कुछ ज्ञानवर्धक जानकारी ले कर आए हैं, उम्मीद है पाठकों को यह ज्ञानवर्धक लगेगी…

