कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर सख्त रुख, प्रभारी निरीक्षक जमानियां पर कड़ी कार्रवाई के संकेत
गाजीपुर।
तहलका 24×7
कोर्ट के आदेश की अनदेखी के मामले में अपर जिला जज प्रथम शक्ति सिंह की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।न्यायालय ने जमानियां थाना प्रभारी के खिलाफ सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा है कि आखिर क्यों न उनकी संपत्ति कुर्क कर उन्हें सिविल कारावास भेजा जाए?मामला उस समय सामने आया जब न्यायालय द्वारा पारित स्थगनादेश के बावजूद जमानियां पुलिस द्वारा लाभार्थियों को बेदखल कर विवादित भूमि पर कब्जा दिलाने का प्रयास किया गया।

अदालत ने इसे न्यायालय की अवमानना मानते हुए गंभीर आपत्ति जताई है।न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब सिविल कोर्ट द्वारा यथास्थिति बनाए रखने का आदेश प्रभावी था,तब किन परिस्थितियों में पुलिस ने परगनाधिकारी के आदेश को प्राथमिकता दी। अदालत ने कहा कि यह न्यायिक पदानुक्रम और विधिक सिद्धांतों के विपरीत है।यह मामला सिविल वाद गोवर्धन बनाम इन्द्रासनी देवी से जुड़ा है,जिसमें 8 अप्रैल 2025 को पारित निर्णय के खिलाफ सिविल अपील दाखिल की गई थी।

इस पर 22 मई 2025 को जिला जज, गाजीपुर द्वारा विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया था, जो अब भी प्रभावी है।आरोप है कि थाना जमानियां पुलिस ने अपीलार्थियों को बेदखल करने का प्रयास किया।जब पुलिस को कोर्ट के आदेश की जानकारी दी गई तो उन्होंने परगनाधिकारी के आदेश का हवाला देते हुए अनुपालन से इनकार कर दिया।अदालत ने इसे कानून के शासन में हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन का दायित्व है कि न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराएं।

यदि वे स्वयं ही आदेश की अवहेलना में शामिल होते हैं तो न्यायालय को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ेगी।फिलहाल न्यायालय ने प्रभारी निरीक्षक जमानियां को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और चेतावनी दी है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर आदेश 39 नियम 2ए सीपीसी के तहत संपत्ति कुर्क कर सिविल कारावास की कार्रवाई की जा सकती है।


















