खुले नाले ने छीनी तीन जिंदगियों पर परिजनों का सवाल “पैसे से लौट सकती है किसी की जिंदगी?”
जौनपुर।
गुलाम साबिर
तहलका 24×7
मछलीशहर पड़ाव पर हुए हादसे को आज पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन जिन घरों के चिराग बुझ गए, वहां का मातम और चीख-पुकार आज भी कम नहीं हुई। खुले पड़े सीवर नाले में गिरकर दो लोगों की मौत हो गई थी। उन्हें बचाने के लिए कूदा एक और युवक भी बिजली की चपेट में आकर काल के गाल में समा गया। तीन परिवारों की खुशियां कुछ ही पलों में छिन गईं।शनिवार को जब मंत्री और जिलाधिकारी मुआवजा देने मृतकों के घर पहुंचे तो वहां का नजारा बेहद दर्दनाक था।

मृतक प्राची मिश्रा की बड़ी बहन ने बिलखते हुए कहा
“कोई कार्रवाई करने के बजाय आप सिर्फ मुआवजे की बात कर रहे हैं। मुआवजा दे सकते हैं आप किसी की जिंदगी का? 5 लाख, 7 लाख या 20 लाख! क्या यही है जिंदगी की कीमत? अगर पैसे से जिंदगी वापस आ सकती है तो आप कीमत बताइए, मैं जैसे भी हो, आपको दूंगी।” बहन के इन सवालों ने वहां मौजूद हर किसी को नि:शब्द कर दिया। परिजनों ने प्रशासन को साफ इनकार कर दिया कि वे किसी भी हाल में बैंक अकाउंट की डिटेल नहीं देंगे।

उनका कहना है कि पहले दोषियों पर कार्रवाई हो, तभी न्याय की उम्मीद बचेगी।स्थानीय लोगों का दर्द है कि इस हादसे ने यह साबित कर दिया कि शहर की लापरवाह व्यवस्था कितनी जानलेवा साबित हो सकती है। खुले नाले और बिजली के खतरनाक जंजाल ने तीन घरों को उजाड़ दिया, लेकिन अब तक जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस त्रासदी ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। लोग पूछ रहे हैं “क्या हमारी जिंदगियों की कीमत महज कुछ लाख रुपये भर है?”

















