जौनपुर : कान्वेंट स्कूलों को मात दे रहा कंपोजिंग विद्यालय सबरहद
# संसाधान, अनुशासन और शिक्षा में भी नंबर वन है विद्यालय
# लैब, लाइब्रेरी, टेलीस्कोप, प्रोजेक्टर से लैस कम्पोजिट विद्यालय की है खासा चर्चा
शाहगंज।
एख़लाक खान
तहलका 24×7
एक ओर जहां सरकारी स्कूलों पर सत्ता शासन की उपेक्षा पर चारो तरफ विलाप हो रहा है वहीं सबरहद गांव का कंपोजिंग विद्यालय देखकर ऐसा लगता है कि कमी सत्ता सरकारों की नहीं बल्कि विद्यालय के जिम्मेदारों की ज्यादा है। इस विद्यालय में प्रधानाध्यापक अशोक कुमार के कठिन परिश्रम से विद्यालय सर्व सुविधाओं से लैस है। यहां छात्र संख्या भी साढ़े आठ सौ से अधिक है।
वर्ष 2007 में इस विद्यालय में प्रधानाध्यापक पद पर अशोक कुमार को तैनात किया गया। उस समय विद्यालय में केवल 70 छात्र रहे। जीर्ण शीर्ण अवस्था में विद्यालय के कमरे, अकेले अशोक कुमार प्रधानाध्यापक और अध्यापक सबकी भूमिका निभाई। काम के प्रति ईमानदारी, कठिन परिश्रम और कुछ अलग करने का ज़ज्बा ऐसा रहा कि 15 साल में स्कूल की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल दिया।

वर्तमान समय में विद्यालय में छात्रों की संख्या साढ़े आठ सौ से अधिक है। विज्ञान, गणित, कम्प्यूटर लैब के अलावा कल्पना चावला के नाम से खगोल विज्ञान का लैब ऐसा है जिसे देखने के लिए क्षेत्र के प्राइवेट विद्यालयों और कान्वेंट स्कूलों के लोग पहुंचने में संकोच नहीं करते। विद्यालय पूरी तरह सीसी टीवी कैमरे से लैस है। सरकारी स्कूल में बच्चों को प्रोजेक्टर से पढ़ाई के साथ उनकी सुविधा के लिए बाकायदा लायब्रेरी भी है। वहीं खगोल विज्ञान में बच्चों को निपुण करने के लिए टेलीस्कोप तक की व्यवस्था है।

हरियाली और बागवानी ऐसी की मानो पूरा विद्यालय ही सेल्फी जोन हो। सबसे खास बात यह है कि यहां पर सुपर 20 के नाम से स्कूल के बीस छात्रों की सुबह शाम अलग बैच चलती है। जिसमें छात्रों को समान्य ज्ञान, गणित, विज्ञान और चिकित्सा संबंधी जानकारी देकर कंपटीशन के लायक बनाने का प्रयास किया जाता है।



















