जौनपुर : ज़मीं ने हिल के बताया कि हुसैन कत्ल हुए की सदाओं के साथ 10वीं मुहर्रम ताजिए का जुलूस बरामद

जौनपुर : ज़मीं ने हिल के बताया कि हुसैन कत्ल हुए की सदाओं के साथ 10वीं मुहर्रम ताजिए का जुलूस बरामद

सुईथाकलां।
मो आसिफ
तहलका 24×7
               क्षेत्र के बड़ागांव में 10वीं मुहर्रम ताजिए का जुलूस निकाला गया यह ऐतिहासिक जुलूस पन्जा-ए शरीफ़ स्थित मरहूम सै. जव्वार हुसैन के अजाखाने से बरामद किया गया जुलूस के पूर्व अजाखाने में तकरीर का आयोजन किया गया जिस को खेताब फरमाया मौलाना सैयद आरजू हुसैन आब्दी ने जिसमें इमाम हुसैन के साथ हुए जुल्म को बयान किया गया लोगों ने उनके मसाएब पर खूब आंसू बहाए।यह जुलूस अपने परंपरा के अनुसार जुलजनाह की सबीह के साथ आलम और ताजिया के साथ निकाला गया और अपने प्राचीन स्थान बड़ागांव स्थित कर्बला जाकर संपन्न किया गया।

जुलूस के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम में भारी पुलिस बल मौजूद रहे। जिसमें प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार आर्य, उप निरीक्षक प्रभु नाथ यादव, राजकुमार यादव, विकेश चौहान, विश्वास पांडे समेत कई पुलिस के जवान उपस्थित रहे। यौम-ए आसूर तारीख की इस्लामिक दुनिया में बहुत बड़ी फजीलत बयान की जाती है जिसमें जो जुल्म और सितम यजीद और उसके साथियों ने खानदाने रसूल पर किए, शायद ही कोई भूल सकता है।कर्बला में शहीद नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन के कटे हुए सर की तिलावात को देखकर लोग हैरान रह गए। जब यजीदियों ने इमाम हुसैन के बेटे नन्हे अली असगर को भी कत्ल कर दिया था और ये मुहर्रम का पूरा महीना बहुत कुछ याद दिलाता है।

इस्लामिक इतिहासकारों के मुताबिक मुहर्रम की दस तारीख में अल्लाह की तरफ से कई वाकियात ऐसे हुए है। जिसमें दस तारीख को आज भी याद किया जाता है। इसी मुहर्रम की दस तारीख को अल्लाह ताला ने हजरत आदम अलेहहिस्सलाम और हजरत दाऊद की तोबा को कबूल किया था। हजरत इद्रीस को मकामे बुलंद की तरफ उठाया। हजरात इब्राहीम की विलादत हुई। हजरत याकूब की रौशनी वापस आई। हजरत युनुस को मछली के पेट से निकाला गया। हजरत मूसा सलामती से दरिया पार हुए और फिरोंन दरिया में डूब गया। हजरत इसा अलेहिससलाम को असमान की तरफ जिंदा उठाया गया और इसी तारीख में कयामत भी आएगी। इसी तारीख में नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन अपने नाना के दीन को बचाने के लिय तीर, नैजा, तलवार के बहत्तर जख्म खाकर 56 साल पांच महीने, पांच दिन की उम्र में जुमा के दिन 61 हि0 मुताबिक सन 680 को शहीद हो गए। हजरत इमाम हुसैन की शहादत अल्लाह की बारगाह में ऐसे कबूल हुई कि यह तारीख उनकी शहादत से मशहूर हो गई।
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