भदोही या संत रविदास नगर? नाम को लेकर फिर गरमाई सियासत, जानिए जिले का पूरा इतिहास

भदोही या संत रविदास नगर? नाम को लेकर फिर गरमाई सियासत, जानिए जिले का पूरा इतिहास

भदोही। 
तहलका 24×7 
                कालीन उद्योग के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध भदोही जिले का नाम एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जिले का नाम”संत रविदास नगर”किए जाने की घोषणा के बाद इस मुद्दे ने नया राजनीतिक रंग ले लिया है।
भदोही जिले का गठन 30 जून 1994 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में वाराणसी जिले से अलग कर उत्तर प्रदेश के 65वें जिले के रुप में किया गया था।जिला बनने के कुछ समय बाद वर्ष 1995 में मायावती की सरकार ने जिले का नाम बदलकर”संत रविदास नगर”कर दिया था।बाद में वर्ष 2012 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार ने इस निर्णय को पलटते हुए जिले का आधिकारिक नाम फिर से”भदोही”कर दिया।
तब से अब तक अभिलेखों में जिले का नाम भदोही ही दर्ज है।भदोही का इतिहास प्राचीन और समृद्ध माना जाता है।ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार यह क्षेत्र कभी भर राजाओं के शासन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा।बाद में यह काशी रियासत का हिस्सा बना और लंबे समय तक वाराणसी जनपद के अधीन रहा।स्वतंत्रता के बाद भी यह वाराणसी जिले का हिस्सा रहा,लेकिन प्रशासनिक सुविधा और क्षेत्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए इसे अलग जिला बनाया गया।
आज भदोही अपनी हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के कारण अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता है।यहां निर्मित कालीन दुनिया के अनेक देशों में निर्यात किए जाते हैं, जिससे इसे “कार्पेट सिटी” के नाम से भी जाना जाता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया घोषणा के बाद जिले का नाम फिर”संत रविदास नगर”किए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
समर्थकों का कहना है कि संत रविदास की जन्मस्थली काशी क्षेत्र से जुड़े इस जिले का नाम उनके सम्मान में होना चाहिए,जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बताते हुए विकास के मुद्दों पर ध्यान देने की बात कर रहा है।हालांकि,जिले का नाम बदलने के लिए राज्य सरकार की औपचारिक अधिसूचना और केंद्र सरकार की आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होना अभी शेष है।ऐसे में फिलहाल आधिकारिक रिकॉर्ड में जिले का नाम भदोही ही है।आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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