“मेरी आवाज़ ही पहचान है” को जीवंत करने वाली स्वर कोकिला लता जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि- डॉ अखिलेश्वर

“मेरी आवाज़ ही पहचान है” को जीवंत करने वाली स्वर कोकिला लता जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि- डॉ अखिलेश्वर

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
               भारत ही नहीं दुनियाभर में शोहरत पाने वाली, करोड़ों दिलों पर राज करने वाली, अपनी सुरीली आवाज़ से मंत्रमुग्ध व मदहोश कर देने वाली हजारों हजार गीत-गजल गाने के पश्चात एक अमिट छाप छोड़ कर हमारे बीच से सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर जी चली गईं।

 

28 सितंबर 1929 को एक मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में संगीत एवं नाटकों का मंचन करने वाले पं दीनानाथ मंगेशकर के पुत्री के रूप में जन्म लिया था। अपने पिता के साथ 05 वर्ष की आयु से ही गायन-अभिनय की शुरुआत करके 13 वर्ष की आयु में पिता को खोने के बाद छोटी बहन आशा जी के साथ साथ पूरे परिवार की जिम्मेदारी बखूबी सम्भाला।1945 में मुम्बई जाना और 1949 में उनकी पहली गीत फिल्म “महल” की “आयेगा आने वाला…..हिट हुई थी।

1962 में एक तरफ उन्हें ज़हर दिया जाना, और कुछ महिने के संघर्ष एवं इलाज से स्वस्थ होना तथा दूसरी तरफ देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में शहीदों की श्रद्धांजलि सभा में लताजी द्वारा “ऐ मेरे वतन के लोगों” जैसी मर्मस्पर्शी गीत प्रस्तुत करके केवल उपस्थित जनों को ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नेहरू को आंखों में आंसू भरने के लिए मजबूर कर दिया था। फिर तो क्या था? कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उनके यादगार गानों में “तू जहां जहां चलेगा मेरा साया साथ होगा”.., “रहें ना रहें हम महका करेंगे”.., “तेरा मेरा प्यार अमर, फिर क्यूं मुझको लगता है डर” .., “ऐ मालिक तेरे बंदे हम”…. सहित भावपूर्ण अमर संदेश के साथ “मेरी आवाज ही पहचान है गर याद रहे, नाम भूल जायेगा चेहरा ये बदल जाएगा” …. जैसे अमिट संदेश भरे आवाज के साथ अब सरस्वती की बर्दहस्तप्राप्त लताजी बसंत पंचमी के अगले दिन 06 फरवरी 2022 को प्रातः 08.12 बजे अंतिम सांस ली। भारत ने राष्ट को समर्पित एक तपस्वी ब्यक्तित्व को खो दिया है। सम्पूर्ण राष्ट्र गमगीन माहौल में श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।

डॉ अखिलेश्वर शुक्ला
विभागाध्यक्ष (राजनीति विज्ञान विभाग)
राजा श्रीकृष्ण दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय जौनपुर
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