राष्ट्रीय हित के आधार पर होना चाहिए नेताओं का चयन- वेदानंद ओझा

राष्ट्रीय हित के आधार पर होना चाहिए नेताओं का चयन- वेदानंद ओझा

स्पेशल डेस्क।
तहलका 24×7
                देश व राष्ट्र के संचालक का चयन जन्म, जाति, वर्ण, धर्म, विद्वता, कर्म व देह के आधार पर नहीं होना चाहिए अपितु राष्ट्र का नेता वही हो सकता, जो निस्पृही, तत्वज्ञ एंव ब्रह्मज्ञ हो। राजा का कोई परिवार नहीं होता कोई जाति नहीं होती और उसका अपना कुछ भी नहीं होता क्योकि जहाँ अपनापन होगा वहाँ पर आसक्ति होगी और एक आसक्त व्यक्ति समाज के हित की कल्पना नहीं कर सकता। जहां उसकी आसक्ति पर प्रहार हुआ वहीं वह लोक हित भूल कर अपनी आसक्ति को बचाने में लग जाएगा।
स्वार्थी नेता व्यक्तिगत व पारिवारिक हितों की रक्षा के लिए देश व राष्ट्रीय हितों को दांव पर लगाने मे नहीं चूकते। महाभारत का युद्ध इसका परम प्रमाण है। पंजाब में गुरु राम दास जी के पुत्र पृथ्वी चंद ने जहाँगीर के साथ मिलकर अपने ही सगे भाई गुरु अर्जुन देव जी महाराज को तप्त बालू मे भुनवाने का निकृष्ट कार्य किया क्यों ? क्योंकि व्यक्तिगत स्वार्थ जब प्रबल हो जाता है तो वहाँ देश के हितों की रक्षा कौन करे ? राज्य के मुखिया की तुलना गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने श्रीरामचरित मानस में बड़े सुन्दर ढंग से की है मुखिया मुख सो चाहिए, खान पान कहुं एक। पालइ पोषइ सकल अंग तुलसी सहित विवेक।। राज्य का मुखिया मुख के समान होना चाहिए। जैसे समस्त खाद्य पदार्थ चाहे मुख को ही समर्पित किये जाते है, लेकिन मुख एक तिनका भी अपने पास नहीं रखता है, यह तुरन्त पेट मे डाल देता है और वहाँ से फिर समान वितरण का कार्य प्रारंभ होता है। इसी प्रकार से राजा को भी होना चाहिए। यदि राजा संग्रही हुआ तो राष्ट्र का पतन व विनाश निश्चित है। यदि देश रहेगा देश का धर्म रहेगा तो ही हमारा अस्तित्व भी है, और यदि देश व देश का धर्म ही नही रहा तो हम कहाँ के रहेंगें ? हमे इतिहास से सीख लेते हुए सावधानी के साथ चिन्तन करना है।
जो स्थिति आज भारत में बन रही है तो वह दिन दूर नही हम पुनः परतंन्त्रता की जंजीरों मे कसे जाएंगे। आम जनता को भी सजग रहते हुए 2024 के लोकसभा के आम चुनाव ही नहीं समस्त चुनावों मे अपने नेता का चयन करना है। कहीं भाई- भतीजावाद जाति- पाति तथा धन सम्पत्ति के प्रलोभन में आकर राष्ट्रीय हितों का बलिदान ना हो जाए।
(लेखक पूर्व संयुक्त आयुक्त व वरिष्ठ भाजपा नेता हैं )
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