जौनपुर : कृषि वैज्ञानिकों ने चलाया गाजर घास उन्मूलन जागरूकता अभियान
केराकत।
विनोद कुमार
तहलका 24×7
नरेंद्र कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र में ही जौनपुर सेकंड के वैज्ञानिकों द्वारा गाजर घास जागो टाइम मिलन अभियान चलाया गया जिसमें केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ संजीत कुमार ने बताया कि गाजर घास आज के समय में फसलों के लिए बहुत बड़ी समस्या उभर रही है।उन्होंने बताया कि गाजर घास 1 साल की पौधा है जो 90 सेंटीमीटर से 1.5 मीटर तक ऊंचा होता है इसकी पत्तियां गाजर या गुलदाउदी की पत्तियां की तरह होती है। इसमें सफेद रंग के छोटे-छोटे फूल लगते हैं। फसलों के साथ-साथ मनुष्य एवं पशुओं को भी हानि पहुंचाता है जिसके संपर्क में आने से एक्जिमा एलर्जी बुखार दमा नजला जैसी घातक बीमारियां हो जाती है गाजर घास के लगातार संपर्क में आने से मनुष्य में डरमेटाटिस, हेफीवर आदि बीमारियां हो जाते हैं।

केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अरुण कुमार ने बताया कि उसकी लुगदी से विभिन्न प्रकार के कागज तैयार किए जा सकते हैं बायोगैस में गोबर के साथ मिलाया जा सकता है। शस्य वैज्ञानिक डॉ संजय कुमार गाजर घास के रोकथाम के तरीके बताएं जिसमें उन्होंने बताया कि गाजर घास को यांत्रिक रसायनिक एवं जैविक विधि द्वारा प्रबंधन किया जा सकता है जिसमें 20 से 25 दिन के पौधों को आसानी से उखाड़ कर गड्ढे में दबा दें।डॉ कुमार ने बताया गाजर घास के ऊपर 20% साधारण नमक की खोल को बनाकर छिड़काव करें। शाकनाशी रसायनों में ग्लाइफोसेट 1.0-1.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी के साथ खाली खेत में स्प्रे करें, सोडियम क्लोराइड 15%तथा अमोनियम सल्फेट 20% का घोल घास के फूल आने तक कभी भी 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर खेतों में एक समान रूप से छिड़काव कर देना चाहिए।


















