सावन की हरियाली से सजा बाजार, महिलाओं की पहली पसंद बनीं हरी चूड़ियां और साड़ियां

सावन की हरियाली से सजा बाजार, महिलाओं की पहली पसंद बनीं हरी चूड़ियां और साड़ियां

खेतासराय,जौनपुर। 
डॉ. सुरेश कुमार 
तहलका 24×7 विशेष 
                     सावन का महीना शुरु होते ही प्रकृति के साथ-साथ बाजार भी हरियाली की रंगत में रंग गए हैं।चारों ओर फैली हरियाली का असर अब महिलाओं के श्रृंगार और पहनावे पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बाजारों में हरे रंग की चूड़ियां,साड़ियां,सूट,कुर्तियां और फैशन की मांग अचानक बढ़ गई है।दुकानों पर सुबह से देर शाम तक महिलाओं और युवतियों की भीड़ उमड़ रही है।हर कोई अपनी पसंद के डिजाइन,रंग और कीमत के अनुसार खरीदारी में जुटा है।
बॉलीवुड के मशहूर गीत ‘गोरी है कलाइयां,तू ला दे मुझे हरी-हरी चूड़ियां…’की तरह सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा आज भी महिलाओं के दिलों में है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब यह परंपरा आधुनिक फैशन के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। नवविवाहिता से लेकर कॉलेज छात्राओं और कामकाजी महिलाओं तक,हर वर्ग की महिलाएं हरे रंग के परिधानों और चूड़ियों को अपनी पहली पसंद बना रही हैं।सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा वर्षों पुरानी है।
इसे सुहाग,समृद्धि,खुशहाली और प्रकृति की हरियाली का प्रतीक माना जाता है।पहले जहां महिलाएं केवल कांच की साधारण हरी चूड़ियां पहनती थीं,वहीं अब बाजार में फैशन के अनुरूप अनगिनत डिजाइन उपलब्ध हैं।गोल्डन डॉट्स वाली चूड़ियां,कुंदन व स्टोन जड़ी चूड़ियां,ऑक्सीडाइज्ड डिजाइन,मेटल बैंगल्स,हैंडमेड ब्राइडल सेट और डिजाइनर ग्लास चूड़ियां महिलाओं को खूब आकर्षित कर रही हैं।कॉलेज जाने वाली युवतियां अपनी ड्रेस से मैच करती हुई हल्की और स्टाइलिश चूड़ियां पसंद कर रही हैं,जबकि नवविवाहिता पारंपरिक डिजाइन वाले भारी चूड़ी सेट खरीद रही हैं।
गृहिणियां भी पूजा-पाठ,हरियाली तीज,कजरी और सावन के सोमवार के लिए विशेष खरीदारी कर रही हैं। वहीं बाजार में हरे रंग की साड़ियों और सूट्स की बिक्री भी तेजी से बढ़ी है।बनारसी ग्रीन सिल्क,चंदेरी,लहरिया, ऑर्गेंजा,शिफॉन और कॉटन साड़ियों की अच्छी मांग बनी हुई है।इसके अलावा ग्रीन कुर्तियां,प्लाजो सेट, अनारकली सूट,इंडो-वेस्टर्न ड्रेस और डिजाइनर दुपट्टे भी महिलाओं की पसंद बन रहे हैं।कई महिलाएं सावन के प्रत्येक सोमवार अलग-अलग शेड के हरे वस्त्र पहनने के लिए खरीदारी कर रही हैं।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना,हरियाली तीज,नाग पंचमी,कजरी तीज और रक्षाबंधन जैसे पर्वों से जुड़ा होता है।इन अवसरों पर महिलाएं सोलह श्रृंगार कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं।धार्मिक मान्यता है कि हरा रंग जीवन,समृद्धि, सौभाग्य और खुशहाली का प्रतीक है।इसी कारण सावन में हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनने का विशेष महत्व माना जाता है।कई महिलाएं व्रत और पूजा के दौरान विशेष रुप से हरे रंग का श्रृंगार करती हैं।स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सावन शुरु होते ही चूड़ियों और महिलाओं के परिधानों की बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी हुई है।
दुकानदारों ने इस बार ग्राहकों की पसंद को देखते हुए हरे रंग की नई-नई वैरायटी मंगाई है।उनका कहना है कि महिलाएं पारंपरिक डिजाइन के साथ आधुनिक और ट्रेंडी विकल्प भी पसंद कर रही हैं।अच्छी बिक्री से बाजार में उत्साह का माहौल है,व्यापारियों को उम्मीद है कि पूरे सावन और तीज-त्योहारों तक यह रौनक बनी रहेगी।युवा पीढ़ी सावन थीम पर फोटोशूट और रील्स बनाने के लिए भी विशेष रुप से हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां खरीद रही है।इंस्टाग्राम,फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सावन लुक साझा करने का चलन बढ़ने से डिजाइनर परिधानों और आकर्षक चूड़ियों की मांग में और इजाफा हुआ है।
सावन केवल मौसम का नहीं,बल्कि भावनाओं,प्रेम, आस्था और उल्लास का महीना है।जब बारिश की बूंदें धरती को हरियाली से ढक देती हैं,उसी समय हरी चूड़ियों की खनक और हरे परिधानों की चमक महिलाओं के चेहरे पर अलग ही मुस्कान बिखेर देती है। यही वजह है कि सावन आते ही बाजारों में हरियाली उतर आती है और हर कलाई मानो एक ही गीत गुनगुनाने लगती है- गोरी है कलाइयां,तू ला दे मुझे हरी-हरी चूड़ियां…
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