180 रुपए की जमीन के लिए 47 साल की कानूनी लड़ाई,खर्च हुए 16 लाख रुपये
लखनऊ।
विजय आनंद वर्मा
तहलका 24×7
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है,जहां महज 180 रुपए में खरीदी गई जमीन के लिए एक किसान परिवार को करीब 47 साल तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़े।लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार दिसंबर 2025 में परिवार को न्याय मिल सका।गोसाईंगंज क्षेत्र के बस्तिया गांव निवासी ब्रजेश वर्मा के अनुसार उनके पिता स्वर्गीय रामसागर ने वर्ष 1965 में करीब पौने दो बिस्वा जमीन खरीदी थी।

लेकिन कुछ वर्षों बाद इस जमीन पर धोखाधड़ी कर फर्जी रजिस्ट्री करा ली गई।बताया जाता है कि वर्ष 1973 में सह-खरीदार शिवरानी ने कथित रुप से फर्जीवाड़ा करते हुए रामसागर की जगह किसी अन्य व्यक्ति को खड़ा कर जमीन अपने नाम दर्ज करा लिया। इस साजिश का खुलासा एक गवाह के विवाद के दौरान हुआ,जिसके बाद रामसागर ने वर्ष 1978 में गोसाईंगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया।यह मामला वर्षों तक अदालत में लंबित रहा।2003 में रामसागर का निधन हो गया।

2013 में शिवरानी की भी मृत्यु हो गई।इसके बावजूद दोनों पक्षों के वारिसों के बीच मुकदमा जारी रहा।करीब पांच दशकों बाद दिसंबर 2025 में अदालत ने ब्रजेश वर्मा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त कर दिया।हालांकि,फैसले के बाद भी जमीन पर कब्जा पाने में परिवार को करीब तीन महीने और इंतजार करना पड़ा।इस लंबी कानूनी लड़ाई में वादी पक्ष को लगभग 16 लाख रुपये खर्च करने पड़े,जो जमीन की मूल कीमत से कई गुना अधिक है।
















