कानपुर में किडनी रैकेट का भंडाफोड़: 8 लाख में खरीद, 1 करोड़ में सौदा। 6 डॉक्टर समेत 7 गिरफ्तार
कानपुर।
तहलका 24×7
प्रदेश के चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाला एक बड़ा खुलासा सामने आया है।पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 6 डॉक्टरों समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।इस गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश से लेकर नेपाल और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ बताया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार,यह गिरोह गरीब और जरुरतमंद लोगों को 8 से 10 लाख रुपये का लालच देकर उनकी किडनी निकलवाता था और फिर उसी किडनी को अमीर मरीजों को 60 लाख से 1 करोड़ रुपये तक में बेचता था।

इस पूरे खेल में करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन हो रहा था।हैरानी की बात यह है कि इस पूरे रैकेट का संचालन एक आठवीं पास एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल कर रहा था।वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए गरीब लोगों को फंसाता और उन्हें किडनी देने के लिए मानसिक रुप से तैयार करता था।इसके लिए वह अमिताभ बच्चन का उदाहरण देकर लोगों को भरोसा दिलाता था कि एक किडनी में भी सामान्य जीवन जिया जा सकता है।

पुलिस ने जिन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है,उनमें आहूजा नर्सिंग होम की संचालिका डॉ. प्रीति आहूजा और उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा के अलावा डॉक्टर डॉ. राजेश कुमार,डॉ. नरेंद्र सिंह,डॉ. रामप्रकाश कुशवाहा और डॉ. कुलदीप शामिल हैं।पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने चिकित्सा नैतिकता को ताक पर रखकर अस्पताल को“गुर्दा बाजार”बना दिया था। जांच में नोएडा के एक डॉक्टर रोहित का नाम भी सामने आया है,जो अपनी टीम के साथ रात के समय अवैध ऑपरेशन करता था।

ऑपरेशन से पहले अस्पताल के स्टाफ को छुट्टी दे दी जाती और सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते थे।फर्जी दस्तावेजों में इसे सामान्य सर्जरी दिखाया जाता था।इस अवैध धंधे के चलते कई मरीजों की जान भी खतरे में पड़ी।एक महिला की हालत बिगड़ने पर उसे मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहां उसकी मौत हो गई। इसके अलावा अन्य मामलों में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए एक अस्पताल को सील कर दिया गया।

फरार आरोपियों डॉ. मुदस्सिर अली,डॉ. अफजल, दलाल नवीन पांडे और वैभव मुद्गल पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ते हुए लखनऊ, मेरठ,अलीगढ़,उत्तराखंड,पश्चिम बंगाल और नेपाल तक छानबीन में जुटी हैं।साथ ही आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की भी तैयारी की जा रही है।बताया जा रहा है कि वर्ष 2025 में इस रैकेट के संकेत मिलने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी,जिससे यह नेटवर्क लगातार फैलता गया।अब इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग व प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।















