“क्या धर्म देखकर घर तोड़े जा रहे हैं”, उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल
श्रीनगर।
तहलका 24×7
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में चल रही तोड़फोड़ के लिए राजभवन की कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि इसके तहत तैनात अधिकारी चुनी हुई सरकार को बदनाम करने के लिए जानबूझकर उसकी मंजूरी के बिना कार्रवाई कर रहे हैं। संवाददाताओं से बात करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार को भरोसे में लिए बिना फील्ड स्टाफ और राजस्व अधिकारियों का प्रयोग तोड़-फोड़ की कार्रवाई के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने कहा संबंधित मंत्रियों की मंजूरी के बिना बुलडोजर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो चुनी हुई सरकार को बदनाम करने की साजिश है। अब्दुल्ला ने कहा अफसर हमारी मंज़ूरी के बिना फ़ैसले ले रहे हैं। रेवेन्यू और फ़ील्ड स्टाफ को चुनी हुई सरकार के तहत काम करना चाहिए, लेकिन हमारी सलाह के बिना बुलडोजर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि यह हमारी सरकार को बदनाम करने की कोशिश है। सीएम का इशारा पत्रकार अरफाज अहमद डैंग के एक मंजिला घर को गिराने की ओर था, जिसका घर उनके पिता ने 40 साल पहले जम्मू में 3 मरला जमीन पर उनके लिए बनवाया था, जिसे गुरुवार को जम्मू डेवलपमेंट अथॉरिटी ने गिरा दिया।

अपना सोशल मीडिया पोर्टल चलाने वाले डैंग ने आरोप लगाया कि जेडीए ने सच बोलने और अपनी रिपोर्टिंग के जरिए पब्लिक के मुद्दे उठाने की वजह से उनके घर को निशाना बनाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जम्मू में ड्रग गठजोड़ के खिलाफ बोलने के बाद जेडीए ने उनका घर गिरा दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तोड़-फोड़ की कार्रवाई एक खास तरह की लग रही थी, सवाल किया कि क्या किसी खास समुदाय को टारगेट किया जा रहा था। उन्होंने कहा, क्या जम्मू में सिर्फ एक जगह गैर-कानूनी थी? सिर्फ एक व्यक्ति को ही क्यों निशाना बनाया गया? क्या यह धर्म की वजह से था? ऐसी कार्रवाई अन्याय पर आधारित है और गंभीर सवाल खड़े करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सरकारी जमीन पर गैर-कानूनी कब्जे को सही नहीं ठहरा सकती, लेकिन हर कार्रवाई एक जैसी, कानूनी और पारदर्शी होनी चाहिए। कहा, हम गैर कानूनी कब्जों का समर्थन नहीं करते, लेकिन पॉलिसी में कार्रवाई कुछ लोगों तक ही नहीं होनी चाहिए। सेलेक्टिव कार्रवाई से शक और अविश्वास पैदा होता है। उन्होंने सरकार के कामकाज में बेवजह दखल देने का आरोप लगाते हुए कहा कि कार्रवाई शुरु करने से पहले मंत्रियों से सलाह भी नहीं ली जाती। संबंधित मंत्री को बताए बिना ऐसे ऑपरेशन कैसे किए जा सकते हैं? यह बार-बार हो रहा है, यह कोई एक बार की घटना नहीं। इसमें जरुर कुछ गड़बड़ है।

अब्दुल्ला ने दावा किया कि तोड़फोड़ का काम उनकी सरकार की औपचारिक मंजूरी के बिना किया जा रहा था। उन्होंने कहा, यह अभियान हमारी सहमति से शुरु नहीं किया गया था। हमें कभी भरोसे में नहीं लिया गया। मुख्यमंत्री ने जेडीए के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर को सरकारी जमीन पर बने सभी गैर-कानूनी ढांचे की सूची पब्लिक डोमेन में जारी करने का निर्देश दिया। कहा, आप देखेंगे कि जम्मू में हजारों लोग शामिल हैं। कार्रवाई सभी के खिलाफ एक जैसी होनी चाहिए, किसी खास समुदाय तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार राजनीतिक दखलंदाजी या चुनिंदा कार्रवाई बर्दाश्त नहीं करेगी।








