सात घंटे तक टावर पर बैठा रहा युवक,सिस्टम देखता रहा तमाशा, जांच में खुली प्रशासनिक लापरवाही की परतें
जौनपुर।
एखलाक खान
तहलका 24×7
बक्शा थाना क्षेत्र के उतरीजपुर गांव में मोबाइल टावर पर चढ़े युवक की मौत मामले में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट ने पुलिस,फायर ब्रिगेड और तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।24 पन्नों की जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि यदि संबंधित विभाग समय रहते सक्रियता दिखाते और समन्वय के साथ काम करते तो युवक की जान बचाई जा सकती थी।

रिपोर्ट के अनुसार 21 मई को भूमि विवाद से परेशान 30 वर्षीय श्रीप्रकाश यादव गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ गया था।वह करीब सात घंटे तक टावर पर बैठा रहा,लेकिन उसे सुरक्षित नीचे उतारने के लिए कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई।मौके पर मौजूद पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और फायर ब्रिगेड की टीमें सिर्फ औपचारिक कार्रवाई करती रहीं।हैरानी की बात यह रही कि इतने लंबे समय तक चले घटनाक्रम के दौरान टावर के नीचे सुरक्षा जाल या अन्य बचाव संसाधनों की व्यवस्था तक नहीं की गई।

जांच में तहसील प्रशासन की लापरवाही को भी घटना की प्रमुख वजह माना गया है।रिपोर्ट के मुताबिक गांव निवासी राजाराम यादव का पड़ोसियों से वर्ष 2016 से भूमि विवाद चल रहा था।कई बार शिकायत और पैमाइश होने के बावजूद मामले का स्थायी समाधान नहीं कराया जा सका।इसी विवाद से मानसिक तनाव में आकर राजाराम का पुत्र श्रीप्रकाश टावर पर चढ़ गया।प्रत्यक्षदर्शियों ने समिति को बताया कि युवक लगातार अपनी पीड़ा और जमीन विवाद की बात कह रहा था, लेकिन अधिकारी उसे गंभीरता से लेने के बजाय औपचारिकताओं में उलझे रहे।

घंटों चले घटनाक्रम के बाद जब युवक नीचे उतरने लगा तो अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह करीब 40 फीट ऊंचाई से नीचे गिर पड़ा।गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया,जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।घटना के बाद जिलाधिकारी सेमुअल पॉल एन ने मामले की जांच के आदेश दिए थे।एडीएम वित्त एवं राजस्व परमानंद झा,परियोजना निदेशक डीआरडीए और बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी की तीन सदस्यीय समिति ने घटनास्थल का निरीक्षण कर ग्रामीणों और अधिकारियों के बयान दर्ज किए।

जांच में पुलिस और फायर ब्रिगेड के बीच समन्वय की कमी उजागर हुई,वहीं तहसील प्रशासन को भूमि विवाद समय पर न सुलझाने का जिम्मेदार माना गया।रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की सिफारिश की गई है।जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों से स्पष्टीकरण भी तलब किया है।अब पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि युवक की मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।

















