काव्य के कसौटी पर मम्मट के विचार ने किया काव्य शास्त्रियों को मंथन के लिए बाध्य- डॉ. अमित तिवारी
सुल्तानपुर।
मुन्नू बरनवाल
तहलका 24×7
‘काव्य प्रकाशकार आचार्य मम्मट ने अपने पूर्ववर्ती आचार्यों के काव्य परिभाषाओं का परिमार्जन कर काव्य लक्षण का नया दृष्टिकोण उपस्थित किया।मम्मट ने दोष और गुण के प्रश्न को सामने लाकर काव्य के कसौटी पर विचार विमर्श के लिए काव्य शास्त्रियों को बाध्य किया।’ यह बातें राणा प्रताप पीजी कॉलेज के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. अमित तिवारी ने कहीं। वह संस्कृत विभाग द्वारा ‘मम्मट का काव्य लक्षण- एक विवेचन’ विषय पर आयोजित विद्यार्थी संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।

डॉ. यशवंत सिंह ने कहा कि ध्वनि के जिस सिद्धान्त का आनंदवर्धन ने सूत्रपात किया था उसको प्रतिष्ठित करने का श्रेय आचार्य मम्मट को जाता है। डॉ. नीतू सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए काव्य में रस की स्थिति को आत्मा के समान अनिवार्य बताया। डॉ. वीना सिंह ने काव्य में अलंकार की स्थिति पर पूर्ण प्रकाश डाला। परास्नातक की छात्रा अनुराधा तिवारी ने अपने शोधपत्र में बताया की कितना ही सुंदर काव्य क्यों न हो किंतु एक दोष भी उसके उत्कृष्टता को कम कर देता है।छात्रा जया सोनी ने कहा कि काव्य की आत्मा रस है अलंकार न भी हो तो काव्यत्व की हानि नहीं होगी। खुशबू ने कहा कि मनुष्य के शौर्य आदि गुणों की तरह काव्य में ओज आदि गुण भी अनिवार्य है। संगोष्ठी में छात्र मनीष, निखिल के अतिरिक्त छात्रा नेहा मिश्रा, सपना दुबे, शिवानी, उर्मिला आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।

















