लौह पुरुष थे स्व. ठाकुर प्रसाद सिंह- डॉ रणजीत सिंह
# प्रेरणा दिवस के रूप में मनाई गई स्व. ठाकुर प्रसाद सिंह की पुण्यतिथि
जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
गांधी स्मारक विद्यालय संकुल के संस्थापक प्रबंधक स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह की 19वीं पुण्यतिथि ‘प्रेरणा दिवस’ के रूप में मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री गांधी स्मारक इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ रणजीत सिंह द्वारा स्वर्गीय संस्थापक की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके किया गया। डॉ सिंह ने पूर्व प्रबंधक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए केदारनाथ अग्रवाल की पंक्तियां- “जब भी देखा लोहा देखा… दोहराते हुए उन्हें अपने विचारों पर अडिग रहने वाला लौहपुरुष बताया।

उन्होंने कहा कि उनका अद्भुत, निडर, दृढ़ निश्चयी और प्रभावशाली व्यक्तित्व इस प्रकार का था कि वह किसी को भी ललकारने की क्षमता रखते थे। उन्होंने बताया कि उनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं था तथा वे अद्वितीय संघर्षशाली महान व्यक्तित्व थे। परिस्थितियाँ कितनी भी विकट क्यों न हों, समस्याओं के सामने उन्होंने कभी झुकना नहीं सीखा। विद्यालय के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देते थे। उन्होंने स्वर्गीय सिंह को समदर्शी, परोपकारी, गरीबों का मसीहा और मोम जैसा पिघलने वाला संवेदनशील महापुरुष बताया।उन्होंने डॉ रूप नारायण त्रिपाठी की रचना रूप सुंदर, चलन भी सुंदर… पढ़कर सबके लिए प्रेरणा स्रोत बताते हुए शुद्ध अंतःकरण हृदय वाला व्यक्तित्व बताया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि वह बाहर से जितने अधिक कठोर है उससे कहीं ज्यादा कोमल हृदय के व्यक्ति थे। पूर्व प्रधानाचार्य ने संगीत शिक्षक प्रेमनाथ सिंह ‘चंदेल’ द्वारा रचित श्रद्धांजलि गीत- सुकीर्ति निर्मल चरित्र पावन… की छात्राओं द्वारा शानदार प्रस्तुति की जमकर सराहना की।

विद्यालय संकुल के प्रबंधक हृदय प्रसाद सिंह ‘रानू’ ने अपने वक्तव्य में कहा कि यदि समस्त शिक्षक पूर्ण समर्पण के साथ समस्त भेद भाव से ऊपर उठकर अपने उत्तरदायित्व का ईमानदारी से निर्वहन करें तो यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्यालय प्रबन्ध कारिणी समिति के सदस्य पं. राम सन्मुख तिवारी ने श्रद्धा सुमन अर्पित किया।अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने पूर्व प्रबंधक को सरल हृदय का व्यक्तित्व बताया।उन्होंने कहा कि यदि हम अपने जीवन में प्रगति की तरफ अग्रसर होते हुए ऊंचाई की बुलंदियों को छूना चाहते हैं तो हमें उनसे प्रेरणा लेनी होगी। गांधी स्मारक पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर बी.के. निर्मल ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उन्हें पूरे विद्यालय परिवार रूपी वाटिका को सजाने, संवारने, पुष्पित और पल्लवित तथा सिंचित करने वाला माली बताया जिन्होंने इसे एक विशाल वटवृक्ष का रूप दे दिया है। आज जिस विद्यालय की जड़ें असीमित गहराई तक पहुंच चुकी हैं।


















