UIDAI ने 1 करोड़ 17 लाख आधार नंबर किए डिएक्टिवेट
नई दिल्ली।
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ऐतिहासिक पहल के तहत यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने पिछले महीने नागरिकों के लिए my Aadhaar पोर्टल पर परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु की सूचना देने की सुविधा प्रदान करने के लिए एक सर्विस शुरू की है। बता दें कि UIDAI एक वैधानिक निकाय है जो भारत के निवासियों को यूनीक आइडेंटिटी नंबर (UID) जारी करता जिसे आधार भी कहा जाता है।आधार डेटाबेस की सटीकता और अखंडता बनाए रखने के उपायों के तहत UIDAI ने लगभग 1 करोड़ 17 लाख मृत व्यक्तियों के आधार नंबर डिएक्टिवेट कर दिए हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार हाल ही में UIDAI ने रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) से आधार संख्या से जुड़े मृत्यु रिकॉर्ड साझा करने का अनुरोध किया है। मंत्रालय ने 16 जुलाई को जारी एक बयान में कहा कि रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने अब तक सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) का उपयोग करके 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 1.55 करोड़ मृत्यु रिकॉर्ड उपलब्ध कराए हैं और वेरिफिकेशन के बाद लगभग 1.17 करोड़ आधार नंबर डिएक्टिवेट कर दिए गए हैं।नॉन-सीआरएस राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ भी इसी तरह की प्रक्रिया जारी है।

अब तक लगभग 6.7 लाख मृत्यु रिकॉर्ड प्राप्त हो चुके हैं, उन्हें डिएक्टिवेट करने का काम जारी है।9 जून को शुरु की गई अपनी नई ‘डेथ रिपोर्टिंग’ सर्विस के बारे में UIDAI ने कहा कि नई सुविधा ‘माईआधार पोर्टल पर परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु की रिपोर्टिंग सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम का उपयोग करके 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में हुई मौतों का डेटा दर्ज करेगी। मायआधार पोर्टल पर परिवार के सदस्यों की मौत की सूचना देने का तरीका परिवार के सदस्य को खुद को प्रमाणित करने के बाद पोर्टल पर मृतक व्यक्ति का आधार नंबर और मृत्यु पंजीकरण संख्या के साथ-साथ अन्य जनसांख्यिकीय विवरण भी प्रदान करना होगा।

इसमें कहा गया है कि परिवार के सदस्य द्वारा प्रस्तुत जानकारी के वेरिफिकेशन प्रक्रिया के बाद, मृतक व्यक्ति के आधार नंबर को डिएक्टिवेट करने या आगे की कार्रवाई की जाती है।गौरतलब है कि यूआईडीएआई बैंकों और अन्य संस्थाओं से मृत्यु रिकॉर्ड प्राप्त करने पर विचार कर रहा है। UIDAI बैंकों और अन्य आधार इकोनॉमिक सिस्टम संस्थाओं से मृत्यु रिकॉर्ड प्राप्त करने की संभावना भी तलाश रहा है, जो ऐसी जानकारी रखते हैं।

आधार जारी करने वाली संस्था मृतक आधार संख्या धारकों की पहचान करने में राज्यों की भी मदद ले रही है। बयान में कहा गया है कि एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 100 वर्ष से अधिक आयु के आधार संख्या धारकों का जनसांख्यिकीय विवरण राज्यों के साथ साझा किया जा रहा है, ताकि यह वेरिफाई किया जा सके कि आधार संख्या धारक अभी भी जीवित है या नहीं। ऐसी वेरिफिकेशन रिपोर्ट प्राप्त होने पर, ऐसे आधार नंबर को निष्क्रिय करने से पहले आवश्यक सत्यापन किया जाएगा।
















