हाईकोर्ट की बेंच होनी चाहिए सभी कमिश्नरी हेडक्वार्टर पर- मो. अरशद ख़ान
लखनऊ।
फैज़ान अंसारी
तहलका 24×7
जिस देश में न्याय नहीं होता वहां अमन कायम नहीं हो सकता, न्याय सस्ता, सबके लिए सुलभ, कम समय में और सबकी पहुंच अंदर होना चाहिए। देश के सभी राज्यों में एक हाईकोर्ट है, और एक या दो बेंच है, जिससे सभी स्टेट के लोगों को प्राब्लम होती है।

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट है, सिर्फ लखनऊ में एक बेंच है, पूरे प्रदेश के लोगों को हाई कोर्ट में जमानत के लिए या मुकदमा लड़ने के लिए इलाहाबाद जाना पड़ता है, पहले उत्तराखंड उत्तर प्रदेश में था तो पहाड़ के लोगों को इलाहाबाद आना पड़ता था, अब उत्तराखंड अलग हो गया। फिर भी मुजफ्फरनगर, सहारनपुर से लेकर झांसी, महोबा, बुंदेलखंड, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, बलिया, सोनभद्र, बनारस, मिर्जापुर के लोगों को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाना पड़ता है। जो बहुत दूर भी है और बहुत महंगा है। उत्तर प्रदेश में बराबर आंदोलन चलता है कि मेरठ में हाई कोर्ट की बेंच होनी चाहिए। आगरा के अधिवक्ता आंदोलन चलाते हैं कि आगरा में हाई कोर्ट की बेंच होनी चाहिए, इलाहाबाद के वकील आंदोलन चलाते हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट इलाहाबाद में रहे और कहीं हाईकोर्ट की बेंच नहीं होनी चाहिए ताकि सारी आमदनी इलाहाबाद के वकीलों को मिले। उन्हें न्याय दिलाने की कम चिंता है, केस हासिल करने की ज्यादा चिंता है।

















