आजमगढ़ : कुख्यात अपराधी कुंटू सिंह समेत नौ सहयोगियों को 10 वर्ष का कारावास

आजमगढ़ : कुख्यात अपराधी कुंटू सिंह समेत नौ सहयोगियों को 10 वर्ष का कारावास

आजमगढ़।
फैज़ान अहमद
तहलका 24×7
                 कुख्यात अपराधी ध्रुव कुमार सिंह उर्फ कुंटू सिंह समेत उसके नौ सहयोगियों को गैंगस्टर मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई। एक दिन पूर्व ही न्यायाधीश ने कुंटू व उसके सहयोगियों को दोष सिद्ध किया था। 10 साल के कारावास के अलावा प्रत्येक को 50 हजार का जुर्माना लगाया गया है।

कुंटू सिंह के खिलाफ जीयनपुर कोतवाली में गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज था। इस गैंग का लीडर ध्रुव कुमार सिंह उर्फ कुंटू सिंह के अलावा अजीत सिंह, कन्हैया विश्वकर्मा, बलिकरन यादव उर्फ साधु यादव, मुन्ना सिंह, राजेंद्र यादव, शिव प्रकाश उर्फ प्रकाश यादव, मोहर सिंह, योगेश उर्फ सोनू, रामनारायण सिंह उर्फ रिंकू सिंह, शिवेश सिंह शामिल थे। गैंगस्टर कोर्ट में मुकदमा चल रहा था। सुनवाई पूरी करने के बाद जज रामानंद ने बुधवार को फैसला सुरक्षित कर लिया था।सजा के लिए बृहस्पतिवार का दिन निर्धारित किया गया। जिसे लेकर बृहस्पतिवार की सुबह से ही न्यायालय में गहमा-गहमी थी। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कुंटू सिंह व उसके सहयोगी कोर्ट में पेश हुए।

अभियोजक पक्ष के वकील संजय द्विवेदी व विनय मिश्रा ने बताया कि गैंग लीडर कुंटू सिंह ध्रुव कुमार सिंह उर्फ गुड्डू सिंह पर 75 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा अन्य आरोपितों का भी आपराधिक इतिहास रहा है। डीएम की तरफ से इन सभी के खिलाफ अवैध तरीके से अर्जित की गई संपत्तियों पर हुई कार्यवाही को भी कोर्ट ने अवलोकन में लिया था। इसके अलावा करीब एक दर्जन साक्ष्यों को परीक्षित कराया गया। लगभग सभी गवाहों ने आरोपितों के खिलाफ गवाही दी। करीब 12 वर्ष पूर्व जीयनपुर कोतवाली में मुकदमा अपराध संख्या 340/10 में पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई थी। जिसमें पुलिस की चार्ज शीट में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जिसमें से अजीत सिंह और गिरधारी की मौत होने के बाद मुकदमे से 27 अगस्त 2021 को नाम हटा दिया गया था।

गैंगस्टर कोर्ट से सजा पाए दोषियों में ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू सिंह के अलावा बलिकरन यादव उर्फ साधु यादव, मुन्ना सिंह, राजेंद्र यादव, शिव प्रकाश उर्फ प्रकाश यादव, मोहर सिंह, योगेश उर्फ सोनू, रामनारायण सिंह उर्फ रिंकू सिंह, शिवेश सिंह शामिल हैं। जिन्हें 10 साल के कठोर कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई है। जुर्माना न अदा करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी पड़ेगी।

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