जौनपुर : बेलौस बढ़ते प्रेशर हॉर्न के चलन से आम जनमानस हलकान

जौनपुर : बेलौस बढ़ते प्रेशर हॉर्न के चलन से आम जनमानस हलकान

# मूक-बधिर की भूमिका में हैं नजर आ रहे हैं जिम्मेदारान

# साइलेंस जोन की भी उड़ रही है धज्जियां, बेईमानी साबित हो रहे हैं सरकारी फरमान

खेतासराय।
अज़ीम सिद्दीकी
तहलका 24×7
                       जनपद जौनपुर वैश्विक स्तर पर प्रदूषण के मामले में टॉप टेन में शामिल है। इन्हीं प्रदूषणों में से एक प्रदूषण है ध्वनि प्रदूषण.. जिस पर सरकार ने मानक तय कर रखे हैं कि किस क्षेत्र में कितना डेसिबल तक बजाना है और किस क्षेत्रों को साइलेंट जोन घोषित किया गया है। जहाँ पर तेज़ आवाज प्रतिबंधित है, लेकिन.. ऐसे में स्थानीय कस्बा सहित क्षेत्र में आस-पास छोड़े बड़े बाजारों में प्रतिबंधित होने के बावजूद भी खुलेआम प्रेशर हॉर्न बजाया जा रहा है। जिस पर जिम्मेदार प्रशासक मूक-बधिर की भूमिका में नज़र आ रहे हैं। जिससे खास तौर पर स्थानीय कस्बा में वाहनों द्वारा नियम के विपरीत प्रेशर हॉर्न स्टेट्स सिंबल बनाता जा रहा है। युवा भी इसे अपनी गाड़ियों में फैशन के रूप में लगाकर खुलेआम चल रहे है। जिससे यात्री, राहगीर सहित आम जनमानस हलकान हो रहे हैं।
कस्बा के मुख्य चौराहों की सड़कों पर प्रेशर हॉर्न लगाएं दो पहिया, चार पहिया वाहन सहित ट्रक चालक भी प्रेशर हॉर्न लगाकर चल रहे है। पुलिस देखने के बाद भी इन पर कार्यवाही नहीं कर रही है। हालांकि न्यायालय ने भी इस पर रोक लगाने के लिए ध्वनि प्रदूषण को लेकर हिदायत देते हुए अंकुश लगाने के लिए निर्देश दिया था लेकिन उसका पालन स्थानीय थाना क्षेत्र में रत्तीभर होते दिखाई नहीं दे रहा है। जिससे बहुत तेज़ से प्रेशर हॉर्न बजाने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। जो आम नागरिको के लिए परेशानियां बढ़ती जा रही है।
आपको बता दे कि युवाओं में इसका क्रेज़ बढ़ता जा रहा है। न्यू मॉडल की बुलेट में लगे साइलेंसर लगाकर चलाना आदत बनती जा रही है। इस पर पुलिस ध्यान नहीं दे रही है। जबकि कम्पनियों द्वारा वाहन बेचते समय सामान्य हॉर्न लगा होता है लेकिन खरीद के बाद काफी लोग अपने वाहनों में तेज आवाज करने वाले प्रेशर हॉर्न लगवा लेते है। युवक बाइक में मौज मस्ती के चलते प्रेशर हॉर्न लगवा लेते है। जिससे आम नागरिक को परेशानी होती है। पुलिस ऐसे लोगों पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है यह समझ से परे है। इस तरह पुलिस की लचर कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा हो रहा है। लोगों में चर्चा है कि इस तरह से प्रेशर हॉर्न बजाने वालों पर पुलिस कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है।

# खुलेआम उड़ती है नियमों की धज्जियां

जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा शहर में कई ऐसे शासकीय कार्यालयों, चिकित्सालयों, न्यायालय व विद्यालयों के पास साइलेन्स जोन घोषित किया गया है। इन स्थानों पर प्रेशर हॉर्न का प्रयोग नहीं किया जा सकता, लेकिन.. नियम कानून को ताक पर रखकर वाहन चालक प्रतिंबन्धित क्षेत्र में प्रेशर हॉर्न बजाकर शासन- प्रशासन को चुनौती देते नजर आ रहे हैं जबकि कस्बा के मुख्य मार्ग पर दर्जनों अस्तपाल, विद्यालय आदि है। कुछ शोहदे किस्म के लोग सगे- सम्बन्धियों से बुलेट बाइक मांगकर विद्यालय के आस-पास प्रेशर हॉर्न का प्रयोग करते हुए नज़र आते रहते है। जिससे वहां से आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में खुलेआम धज्जियां उड़ रही है और जिम्मेदार मौन है?

# दुकानदार व क्षेत्रवासियों की मांग, लगना चाहिए प्रतिबन्ध

सुबह से लेकर रात तक तेज़ हॉर्न लगे दुपहिया चार पहिया वाहन सड़कों पर दौड़ते है। ये वाहन कस्बा के गलियों में भी घूमते है। यह मुख्य रूप से तब ज्यादा देखने को मिलता है जब कॉलेजो में छात्राओं का आने-जाने का समय होता है तब तेज़ हॉर्न से विशेष रूप से बुजुर्गों और मरीजों को वाहनों की तेज आवाज परेशान करती है। बच्चे भी अचानक तरह-तरह की तेज आवाज सुनाई देने से डर जाते है। ऐसे में स्थानीय दुकानदार व क्षेत्रवासियीं ने जिम्मेदार लोगों से पुलिस व परिवहन विभाग से प्रेशर हॉर्न लगे वाहनों की धरपकड़ कर उनके विरुद्ध कार्यवाई की मांग किया है, इस पर पूरी तरह से नियंत्रण होना चाहिए। सड़क पर व पैदल चल रहे बच्चों, बुजुर्गों, साइकिल सवार प्रेशर हॉर्न की वजह से घबरा जाते है। दुपहिया ही नहीं फोरविलर, बसों और ट्रकों में भी प्रेशर हॉर्न लगा कर चल रहे है।

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