जौनपुर : सुर्खियों में रहता है खेतासराय का जय माँ विन्ध्वासिनी दुर्गापूजा पण्डाल
# नवरात्रि के सप्तमी के दिन खुलता है कपाट, दर्शन करने के लिए उमड़ती है भीड़
खेतासराय। अज़ीम सिद्दीकी तहलका 24×7 खेतासराय के गोलाबाज़ार मोड़ के समीप सजने वाला जय माँ विंध्यवासिनी दुर्गा पूजा पण्डाल जिले में सुर्खियों बटोरता रहता है। इस पण्डाल पर दूर- दराज से दर्शन करने के लिए श्रद्धालु आते है। पण्डाल नवरात्रि के अंतिम तीन दिन तक लगातार चलता रहता है। यह पण्डाल जिले में अपना एक स्थान रखता है और जिले स्तर पर सम्मानित हो चुका है।
बताया जाता है कि यह पण्डाल जब से सजता आ रहा तब से लेकर अब तक जिले में पांच बार स्थान बनाया है। यह क्षेत्रवासियों के लिए गर्व की बात है। डेढ़ दशक से संजने वाला यह पंडाल को देखने के लिए श्रद्धालु आतुर रहते है। रातभर पण्डाल और कस्बा में जयकारे उद्घोष होता रहता है तथा पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है। पण्डाल पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पण्डाल की डिजाइनिंग की जाती है। हर साल एक से बढ़कर एक सजावट की जाती है। यह पण्डाल कम समय में ज्यादा ख्याति अर्जित कर चुका है।
# ग्रामीणांचल स्तर पर जनपद में टॉप कर चुका है पण्डाल
जनपद जौनपुर में दुर्गा पूजा महासिमित सक्रिय रूप से काम करती है। जो जिले के विभिन्न इलाकों में सजने वाले पंडालों का निरीक्षण करके उनको शॉर्ट लिस्ट करके भव्य कार्यक्रम का आयोजन कर सम्मानित करने का काम करती है। जिसमें 2018 में खेतासराय कस्बा का यह अनोखा जय माँ विंध्यवासिनी दुर्गा पूजा पण्डाल को ग्रामीण स्तर पर सजने वाले पंडालों में प्रथम स्थान मिल चुका है। इसके अलावा यह पण्डाल अब तक जिले में चार बार द्वितीय स्थान प्राप्त करता चला आ रहा है।
# सन 2008 में लेखपाल स्व. विपेंद्र चौधरी ने रखी थी पण्डाल की नींव
स्थानीय कस्बा के चौहट्टा वार्ड निवासी स्व. विपेंद्र चौधरी (लेखपाल) ने इस पण्डाल की नींव रखी थी। सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ हिस्सा निभाने के मामले में अग्रणी भूमिका अदा करते थे। लेकिन दुर्भाग्य ही ऐसा हुआ कि इस पुण्यात्मा की असामयिक निधन हो गया। लेकिन यह पण्डाल उनकी स्मृति को सजोये रखा है तथा निर्बाधगति से सजता हुआ चला आ रहा है। इस पण्डाल को सजने का लोगों का इंतज़ार रहता है। इस पंडाल को देखने के लिए महिलाएं, बुर्जुर्ग, बच्चे सब उत्सुक रहते है। इस पण्डाल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ एकत्र होती है। पण्डाल नवरात्रि के सप्तमी के दिन कपाट खुले जाता हैं और अष्टमी, नवमी और दशमी तक चलता रहता है।
# क्या कहते है पण्डाल के अध्यक्ष
जय माँ विन्ध्वासिनी दुर्गा पूजा पण्डाल समिति के अध्यक्ष बृगनाथ जायसवाल ने बताया कि पण्डाल को श्रद्धालुओं के सुविधा को देखते हुए सजावट किया जाता है। इसको मुक्कमल स्वरूप देने से पूर्व एक बैठक का आयोजन किया जाता है। जिसमें पण्डाल की रूपरेखा तैयार किया जाता है। उसके मुताबिक चरणबद्ध तरीके से काम किया जाता है। कार्यकर्त्ताओं के बदौलत जिले में पण्डाल का नाम रोशन करता है।
पण्डाल वर्तमान समय से चलने वाले चीज़ों पर आधारित बनाया जाता है। जो सबको मोहित कर लेता है। हमेशा कोशिश रहती है कि पण्डाल को बेस्ट दिया और किया जाएं। पण्डाल पर आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत और अभिनन्दन है। उनके सुविधा के लिए समिति के सदस्य तत्पर है। उन्होंने आगे बताया कि पण्डाल के अंतिम दिन समाज के प्रबुद्धजनों को सम्मानित करने का कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है। जिसमें पत्रकारगण चेयरमैन, सभासद, वकील, डॉक्टर आदि लोग शामिल रहते है।