धनतेरस पर पूजे गये धन के देवता कुबेर महराज
# बाजारों में लौटी रौनक, खूब बिके गहने-बर्तन और गृहस्थी के सामान
जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
पौराणिक कथाओं के अनुसार धनतेरस और दीपावली का महत्व आदिकाल से चला आ रहा है। विजय प्राप्ति के बाद प्राय: दीप जलाये जाते थे जो दीपावली का ही प्रतीक रहा। दीपावली के दो दिन पहले धनतेरस के रूप में भगवान कुबेर की पूजा करके धन, समृद्धि की कामना की जाती है। लोक परम्परानुसार उक्त तिथि पर आभूषण से लेकर बर्तन और साफ-सफाई के लिए झाडू तक की खरीदारी होती है।

शनिवार को जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीणांचल की बाजारों में भीड़ ज्यादा रही। गहने की दुकानों पर जहां खरीदारी जोरों पर हो रही थी वहीं बर्तनों की दुकानों पर भी विभिन्न प्रकार के बर्तन खरीदे गये। इसी के साथ-साथ धनरतेस का पर्व शनिवार को पड़ने के कारण वैदिक रीति-रिवाज से पूजा भी की जायेगी। ज्योतिषी पंडित अखिलेश मिश्र के अनुसार शनिवार को धनतेरस होने के कारण यह तिथि अति महत्वपूर्ण है। धन पर शनि का प्रभाव न पड़े इस उद्देश्य से भी अधिसंख्य हिंदू व्रत के साथ कुबेर और शनिदेव का पूजा अवश्य की जायेगी।

धनतेरस और दीपावली की बात की जाये तो त्रेता युग में भगवान रामचन्द्र और द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण सगे-संबंधियों के साथ दीपावली पर्व पर भगवान कुबेर का पूजा-पाठ किये थे। किदवंती के अनुसार समाज का हर वर्ग छोटा हो या बड़ा, गरीब या अमीर धन प्राप्ति के लिये इस तिथि पर अपनी हैसियत के हिसाब से पूजा-पाठ कर दान-दक्षिणा तक देते हैं। शनिवार को प्रात: काल से खरीदारी का जो सिलसिला शुरू हुआ वह देर शाम तक चलता रहा। इसी तरह जिले की अन्य तहसील मुख्यालयों पर बड़ी बाजारों में भी गहना, कपड़ा, बर्तन और मिठाई की खरीदारी जोरों पर होती रही। भक्त सुख, समृद्धि और धन के लिए धनतेरस पर देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। कई अन्य धार्मिक त्योहारों की तरह, धनतेरस भी कुछ लोकप्रिय हिंदू पौराणिक उपाख्यानों से जुड़ा है।

# धनतेरस पर क्यों खरीदी जाती है झाड़ू ?
इस बार धनतेरस का त्योहार दो दिन मनाया जा रहा है। 22 अक्तूबर को शाम 6 बजे त्रयोदशी तिथि लग जाएगी और फिर प्रदोष काल मुहूर्त में पूजा और खरीदारी हो सकेगी। वहीं उदया तिथि के आधार पर 23 अक्तूबर 2022 धनतेरस मनाया जाएगा। धनतेरस पर सोने-चांदी के सिक्के और आभूषणों की खरीदारी की जाती है। इसके अलावा धनतेरस पर मां लक्ष्मी की सबसे प्रिय चीज झाड़ू भी खरीदी जाती है। माता लक्ष्मी को साफ-सफाई और सुंदरता बहुत ही प्रिय होती है। जहां साफ-सफाई और सजावट होती है वहां पर मां लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए धनतेरस पर झाड़ू खरीदी जाती है। वास्तुशास्त्र में झाड़ू को लक्ष्मीजी का प्रतीक माना गया है। इसलिए यदि झाड़ू को ठीक ढंग से न रखा जाए तो इसका दुष्प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है।

बाजार में बर्तनों की खरीदारी की बात करें तो नगर के प्रतिष्ठित दुकान भारत ग्लास हाउस पर भी भीड़ पूरे दिन जमा रहे लोगों ने जमकर खरीदारी किया वहीं भारत ग्लास हाउस के प्रोपराइटर बनवारी लाल ने बताया कि इस वर्ष रिकॉर्ड तोड़ो खरीदारी हुई है। शाहगंज के प्रमुख बर्तन व्यवसायी बीते कई सालों का जो नुकसान था वह इस वर्ष लगभग बराबर हो गया है लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। दुकान पर भीड़ लगी हुई है।

इसी क्रम में नगर के प्रतिष्ठित स्वर्ण आभूषण के विक्रेता सिद्धिविनायक ज्वेलर्स पर भी स्वर्ण आभूषणों को खरीदने के लिए भारी भीड़ लगी रही लोगों ने जमकर खरीदारी किया। सिद्धिविनायक ज्वेलर्स के प्रोपराइटर सूरज सोनी ने बताया कि इस बार सोने के दामों में थोड़ा कमी है लेकिन बीते वर्षो की बात करें तो इस वर्ष लोगों ने जमकर खरीदारी किया है लोगों में उत्साह भी देखा जा रहा है हमारी दुकान पर ग्राहक पूरी तरह से संतुष्ट हैं।

शाहगंज के मंगलम् ज्वेलर्स के प्रोपराइटर शुभम साहू ने बताया कि बीते दो वर्ष कोरोना की भेंट चढ़ चुका बाजार अब सुधरा है बाजारों में भारी भीड़ देखी जा रही है। लोग जमकर सोने चांदी के बर्तनों और आभूषणों की खरीदारी कर रहे हैं। वहीं शाहगंज के रेडिमेड व्यवसायी फैशन फ़र्स्ट के प्रोपराइटर मनीष भाई ने बताया कि कोरोना काल के बाद भी लोगों में खासा उत्साह है और लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं। बीते 2 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा है।

रुहट्टा स्थित हरिओम ज्वेलर्स पर भी ग्राहकों की काफी भीड़ देखी जा रही है। दुकान के मालिक दिलीप कुमार ने बताया कि इस वर्ष दुकानों की रौनक लौट आयी है। लोग खरीदारी कर रहे।दुकान पर ग्राहकों की भीड़ जमा है।महँगाई का कोई असर नहीं है। गणेश लक्ष्मी की सजी दुकानों पर लोग गणेश लक्ष्मी की प्रतिमाएं भी जमकर खरीद रहे हैं।
















