जौनपुर : गर्भवती महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों ने किया हास्पिटल में हंगामा

जौनपुर : गर्भवती महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों ने किया हास्पिटल में हंगामा

# परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, कहा… इंजेक्शन लगाते ही हुई महिला की मौत

# डॉ बीएस उपाध्याय के आशादीप हास्पिटल में सर्प दंश का था मामला

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
                   एक तरफ जहां सरकार गरीबों को मुफ्त इलाज देने के लिए जिला अस्पताल, ट्रामा सेंटर, मेडिकल कॉलेज स्थापित कर रही है साथ ही निजी नर्सिंग होम पर छापेमारी की कार्रवाई भी जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है बावजूद इसके जिले में तमाम ऐसे नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं जहां अप्रशिक्षित डॉक्टर-नर्स द्वारा मरीजों की आए दिन जान ली जा रही है।
ताजा मामला नगर के अहियापुर स्थित आशादीप हॉस्पिटल का है। जहाँ रविवार की शाम एक महिला की मौत हो जाने के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप था कि डॉ बीएस उपाध्याय ने मरीज को देखने के बाद 10 हजार का इंजेक्शन लगवाने का आदेश दिया था, और कहा था कि वह ठीक हो जाएंगी लेकिन इंजेक्शन लगाते ही उक्त महिला की मौत हो गई जिससे नाराज परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।
बदलापुर तहसील के बेलांव गांव निवासी गर्भवती महिला मेनका चौहान 27 वर्ष पत्नी लालू चौहान को सांप ने काट लिया था। परिजन उसे लेकर नगर के डॉ बीएस उपाध्याय के आशादीप हॉस्पिटल पहुंचे थे। जहां डॉक्टर ने मरीज को देखने के बाद आश्वस्त किया था कि वह ठीक हो जाएगी उसे 10 हजार का एक इंजेक्शन तत्काल लगाना पड़ेगा। परिजनों ने हॉस्पिटल में बने मेडिकल स्टोर से उक्त इंजेक्शन को खरीदा और स्टाफ को लगाने के लिए दिया लेकिन इंजेक्शन लगते ही उक्त महिला की मौत हो गई जिसके बाद परिजन हंगामा करने लगे। मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने किसी तरह मामले का शांत कराया और कार्रवाई करने की बात कही।
आये दिन डॉ बीएस उपाध्याय पर मरीज से लापरवाही करने जाने का आरोप लगता रहा है ऐसे में इस मामले ने एक बार फिर उनकी साख पर बट्टा लगा दिया है। अभी 2 दिन पहले ही जौनपुर एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने ऐसे निजी नर्सिंग होम ऊपर सख्त कार्रवाई करने की बात कही थी लेकिन जिला प्रशासन सुदूर क्षेत्रों में खानापूर्ति कर नगर के अंदर संचालित हो रहे हो तमाम नर्सिंग होम को धड़ल्ले से चलने की सहमति दे रखी है जो मानक विहीन चल रहे हैं।
जहां से एक मोटी रकम हर महीने स्वास्थ्य विभाग के कुछ खास लोगो को पहुंचती है। जिनके शह पर ऐसे नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों पर कोई चेकिंग नहीं की जाती है और ना ही डॉक्टरों नर्सों की जांच पड़ताल की जाती है वह कितने सही हैं और कितने गलत है। यदि किसी द्वारा इसकी आवाज उठाई जाती है तो संबंधित नर्सिंग होम के संचालक और उनके ठेकेदारों द्वारा विभाग से मिलीभगत करके मामले को ठंडे बस्ते में डालकर रफा-दफा कर दिया जाता है।
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