जौनपुर : हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान यही है मेरे राष्ट्र की पहचान- प्रखर
जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
सरजू प्रसाद शैक्षिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था जज कॉलोनी जौनपुर के तत्वाधान में हिंदी दिवस पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने कहा कि हिंदी का समूचा इतिहास हिंदी का जन्म संत साहित्यकारों के द्वारा हुआ है तुलसी, सूर, जायसी, कबीर और मीरा है।हिंदी की दो धाराएं रही सिद्ध और बुद्ध। हिंदी के आंदोलन को खड़ा करने में महावीर प्रसाद द्विवेदी, भारतेंदु हरिश्चंद्र, खत्री जी और श्यामसुंदर दास। विशिष्ट अतिथि साहित्यकार गिरीश श्रीवास्तव गिरीश ने पढ़ा रस छंद अलंकार का अनुपम प्रबंध है।

चारों तरफ से आ रही हिंदी का की गंध है। रससिकत कर रही हैं हिंदी गिरीश को निखरी हुई है हिंदी बिखरी सुगंध है। मुख्य अतिथि प्रधानाचार्य बीआरपी इंटर कॉलेज डॉक्टर सुभाष सिंह ने कहा हम खुद हिंदी विरुद्ध है हम खुद अपने बच्चे को हिंदी नहीं पढ़ाना चाहते यह एक विडंबना है। हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान यही है मेरे राष्ट्र की पहचान। जीवन जो धरा पर आया है हिंदू उत्पत्ति में सभी की समानता एक है। भाषाएं, सोच बंट गई है जो हमारा सनातन धर्म है जो हिंदस्थ हो जाता है हिंदी में हमारा धर्म और संस्कृति छिपी है। हम पाश्चात्य सभ्यता का नकल कर रहे हैं। राजेंद्र प्रसाद ने कहा था हिंदी बचाओ राष्ट्र को बचाओ। हमारा उद्देश्य है हिंदी को विश्व पटल पर लाना है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए मध्यस्था अधिकारी डॉ दिलीप सिंह ने कहा कि हिंदी विश्व की सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा है। यह वैज्ञानिक रूप से भी सर्वोत्तम है। इसका शब्द कोष साहित्य भाषा ज्ञान विज्ञान संसार के हर साहित्य से बड़ा है लेकिन दुर्भाग्य है कि अपने देश में ही राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई तो फिर संयुक्त राष्ट्र संघ में अंतरराष्ट्रीय भाषा कैसे बनेगी। साहित्यकार फूलचंद भारती ने हिंदी रामायण संग गीता का उपदेश दिलाती है।हिंदी सत्य,अहिंसा परम धर्म का पाठ सिखाती है। हिंदी ममतामई माता की तस्वीर दिखाती है। हिंदी रस साहित्य समाज का दर्पण है यह बताती है।



















